संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। संगीत परमपिता को याद करने का सरल तथा सुगम माध्यम है। इससे ईश्वर की अनुभूति होती है। सूफी संगीत के माध्यम से ही व्यक्ति रूहानियत को प्राप्त कर सकता है। मधुर कंठ से जब सूफी गायकी के नगमे निकलते हैं तो मन स्वयं ही झूमना शुरु कर देता है। यह कहना है प्रख्यात समाजसेवी व लेखक डॉ. जयभगवान सिंगला का।
वे हरियाणा कला परिषद् में आयोजित होने वाली साप्ताहिक संध्या में सूफी गायकी से सजे कार्यक्रम जुस्तजू के दौरान श्रोताओं को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। मौका था सूफी कार्यक्रम का, जिसमें सूफी गायक विक्रम सिरोहीवाल ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ने मुख्यातिथि का स्वागत किया। रमेश सुखीजा, शिव कुमार किरमच विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विक्रम सिरोहीवाल ने बिना माही कीवें दिल पर्चावां रातां दी मेरी नींद उड़ गई से पूरे माहौल को मस्त बना दिया। ये जो हल्का हल्का सुरूर है सब तेरी नजर का कसूर है जैसे बेहतरीन नगमों के द्वारा विक्रम सिरोहीवाल ने सभी का दिल जीता।
आ माहिया तैनूं अखिंया उड़ीक दियां, सानूं रोग लाण वालेया सज्जना आदि सूफी नगमों को सुनकर हर कोई अपने स्थान पर झूमता नजर आ रहा था। जहां एक ओर विक्रम सिरोहीवाल की मधुर आवाज में सजे सूफी नगमें सभी को मदमस्त कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा पढ़े जा रहे शेर भी सबको लुभाने में कामयाब रहे।
श्रोताओं की फरमाईश पर भी सिरोहीवाल ने बहुत से बेहतरीन सूफी गीतों को सुनाया। कार्यक्रम में तबले पर शुभम, कीबोर्ड पर राजकमल, ड्रम पर मोहित ने साथ दिया तथा कोरस में राकेश सुरताल, गेवि, व गुरसिमरन ने संगत दी।