पिछले कई वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा मीरी पीरी मेडिकल संस्थान के प्रोजेक्ट को लेकर एसजीपीसी अमृतसर के सदस्यों द्वारा प्रोजेक्ट फाइल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को दे दी गई है।
अमर उजाला से मंगलवार को कुरुक्षेत्र के छठी पातशाही गुरूद्वारे में हुई विशेष बातचीत में एसजीपीसी अमृतसर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने बताया कि मीरी पीरी संस्थान का सालों से अधर में पड़ा प्रोजेक्ट कार्य एक वर्ष के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। इसका लाभ प्रदेश भर के छात्रों व रोगियों को प्राप्त होगा।
उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल द्वारा हरियाणा मुख्यमंत्री को लटका पडे़ एनओसी के मुद्दे पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट दे दी गई है। जहां सीएम खट्टर ने प्रोजेक्ट पर जल्द ही कार्रवाई करने की बात कही।
बताना जरूरी है कि शाहाबाद में स्थित मीरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च का शिलान्यास वर्ष 2006 में शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष एवं पंजाब सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के कर कमलों द्वारा किया गया था और उस समय इस प्रोजेक्ट की कुल राशि 200 करोड़ रखी गई थी।
विर्क के मुताबिक अरबों रुपए के इस प्रोजेक्ट पर होने वाला पूरा खर्च एसजीपीसी के कोष से निर्माण कार्य पर लगेगा। एसजीपीसी अमृतसर को अब केवल भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा किया गए वायदे को हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
कुरुक्षेत्र, हरियाणा समेत अन्य राज्य को भी मिलेगा लाभ
शाहाबाद में जीटीरोड़ पर एसजीपीसी के मीरी पीरी मेडिकल कालेज के अधर में लटके प्रोजेक्ट के सिरे चढ़ने से सबसे ज्यादा लाभ कुरुक्षेत्र और इसके आसपास जिलों समेत हरियाणा ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के मेडिकल के विद्यार्थियों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिल सकेगा।
एसजीपीसी का प्रोजैक्ट है मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज
शेरशाह सूरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अधर में लटका मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज का प्रोेजेक्ट शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आरंभ किया था।
मगर यूपीए की हरियाणा सरकार से एनओसी न मिलने की वजह से पिछले काफी समय से यह परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। लगातार दस साल तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकार से एनओसी लेने में नाकाम रही एसजीपीसी की निगाह अब हरियाणा में पहली बार बनी भाजपा सरकार पर आकर टिक गई है।
शुरू हुआ था निर्माण
शिरोमणी अकाली दल प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार तेजेंद्र पाल सिंह ढिल्लों ने बताया कि शाहाबाद में स्थित मीरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंस एंड रिसर्च पर 1992 में एसजीपीसी के अध्यक्ष सरदार गुरचरण सिंह की अध्यक्षता में निर्माण कार्य शुरू हुआ था,जिसमें संस्थान की बाहरी दीवारों के साथ संस्थान का भवन बनाने का कार्य हुआ था।
उनके अनुसार उस समय इस प्रोजेक्ट का 100 करोड़ रुपए का अनुदान एसजीपीसी ने खर्च किया था। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार इस प्रोजेक्ट को जल्द एनओसी देती है तो इससे बड़ी मानवता की सेवा और क्या हो सकती है।
एसजीपीसी प्रतिनिधिमंडल मिला सीएम खट्टर से
एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने खुलासा करतेे हुए कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रतिनिधिमंडल हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिला था।
जिसमें उन्होंने अधर में लटके मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज शाहाबाद को एनओसी देने के संदर्भ में मुख्यमंत्री से अपील की है।