कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के बाद गीता शोध केंद्र की ओर से गीता प्रवाह की नई पहल शुरू की गई। गीता प्रवाह संगोष्ठी का उद्देश्य कुरुक्षेत्र को आध्यात्मिक संवाद के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करना है। लिहाजा, इसी कड़ी में जीओ गीता संस्थान में गीता प्रवाह संगोष्ठी का आज 21 दिसंबर को शुभारंभ होगा। यह संगोष्ठी हर महीने होगी, जिसमें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद गीता का शाश्वत संदेश देंगे।
गीता प्रवाह संगोष्ठी के साथ विश्व ध्यान दिवस पर भी ध्यान साधना के जरिये शांति का संदेश दिया जाएगा। 21 दिसंबर की सायं को गीता प्रवाह संगोष्ठी के बाद विश्व ध्यान दिवस पर ध्यान साधना सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य गीता के शाश्वत संदेश को समकालीन जीवन से जोड़ते हुए बौद्धिक विमर्श और आध्यात्मिक संवाद की परंपरा को सशक्त करना है। जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि विश्व ध्यान दिवस पर आयोजित ध्यान साधना सत्र का थीम, गीता संग जीने का ढंग बनाएं, ध्यान जीवन का अंग बनाएं’ यानी आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में ध्यान ही वह साधन है, जो मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। विश्व ध्यान दिवस के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि ध्यान केवल साधना नहीं, बल्कि स्वस्थ और सार्थक जीवन की कुंजी है। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक ध्यान के माध्यम से आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैश्विक सद्भाव का संकल्प दिलाया जाएगा।
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गीता मनीषी देंगे गीता संदेश और कर्मयोग की प्रेरणा
जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि गीता प्रवाह केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि विचारों का वह प्रवाह है, जो मानव जीवन को कर्म, कर्तव्य, धर्म और आत्मबोध की दिशा प्रदान करता है। इस मंच के माध्यम से गीता के गूढ़ तत्वों पर प्रबुद्ध चर्चा होगी। स्वामी ज्ञानानंद संगोष्ठी के जरिये ने केवल गीता के ज्ञान का संदेश बल्कि जीवन को संतुलन, शांति और कर्मयोग की दिशा में प्रेरित करने की प्रेरणा भी देंगे।