कुरुक्षेत्र। श्री विष्णुपुराण ज्ञान कथा में श्रद्धालुओं के साथ कथावाचक। स्वयं
कुरुक्षेत्र। भक्त और भगवान के बीच बडा ही भावनात्मक संबंध है। भगवान अपने भक्त को कष्ट में नही देख सकते। भगवान की भक्त वत्सलता भक्त के प्रति कैसी है यह हमें श्री विष्णु पुराण में पता चलता है। गुरु के मुख से निकले शब्द और गुरु द्वारा दिये मंत्र में शक्ति होती है। गुरु के हाथ से तो मिठाई और पकवान भी प्रसाद बन जाते है। भगवान की भक्ति और गुरु की महिमा का वर्णन सेक्टर तीन के शिव मंदिर में चल रही कथा आयोजित श्री विष्णुपुराण ज्ञान कथा यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास रमेश पाराशर ने नारायण भक्तों के सामने प्रस्तुत किए।
कथा वाचक पाराशर ने वीरवार को पांच साल के नारायण भक्त ध्रुव की भक्ति और तपस्या, नामदेव, तुकाराम, प्रहलाद द्वारा हरि की भक्ति, विष्णु पुराण में काल की स्थापना, काल चक्र से परे नारायण की भक्ति से प्राप्ति, भगवान की भक्ति करते हुए व्रतों का अनुष्ठान, एकादशी व्रत का महत्व, नवग्रहों के भगवान के अधीन होने सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के प्रसंगों के साथ ही भजन मंडली द्वारा हरि भजनों की प्रस्तुतियों पर पांडाल में मौजूद भक्तो ने जमकर कीर्तन किया।