कुरुक्षेत्र। जून माह में होने वाली सूरजमुखी खरीद में किसानों को 1181 रुपये का फटका लगने की आशंका है। इसके कारण भारतीय किसान यूनियन अभी से सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार के तय किए गए सूरजमुखी भाव में यह अंतर सामने आया है। यह मुद्दा भाकियू मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएगी और खरीद प्रक्रिया एक माह के बजाय दो माह जारी रखने की भी मांग की जाएगी।
भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सूरजमुखी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7721 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। यह घोषणा कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के 2 जून 2025 को जारी पत्र के माध्यम से की गई जबकि प्रदेश सरकार की खरीद एजेंसी हैफेड की ओर से जारी खरीद नीति के मुताबिक सूरजमुखी का भाव मात्र 6540 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। साथ ही खरीद अवधि 1 जून से 30 जून 2026 तक तय की गई है। उन्होंने कहा कि भाव के इस अंतर से किसानों को 1181 रुपये का सीधे तौर पर नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह खरीद अवधि कम से कम दो महीने की होनी चाहिए ताकि सभी किसानों को अपनी फसल बेचने का उचित अवसर मिल सके।
23 मार्च की रैली में तय की गई थी बैठक
भाकियू चढूनी गुट की 23 मार्च को पिपली अनाज मंडी में रैली की गई थी। इसमें धान घोटाले की सीबीआई जांच सहित किसानों के संबंध में अनेक मुद्दे उठाए गए थे। इन पर सहमति के लिए जिला उपायुक्त ने 2 अप्रैल को मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराए जाने का भरोसा दिया था। भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि इस बैठक में अब सूरजमुखी का सामने आया, यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।