संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से कला कीर्ति भवन में तीज उत्सव धूमधाम से मनाया गया। सावन के मल्हार और पारंपरिक गीतों की तान से वातावरण संगीतमय हो गया। भरतमुनि रंगशाला के बाहर पारंपरिक परिधान में महिलाओं ने सावन और तीज के गीत प्रस्तुत किए, वहीं बीन वादन नवीन नाथ के दल ने लोगों को बीन की स्वर लहरियों पर झूमने पर विवश किया।
सावन के पावन महीने में समूचा भवन लोक संस्कृति, सतरंगी लोक परंपराओं और त्योहार के असीम उल्लास के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया। इस दौरान महिला कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लाख टके का बीजणा, पाणी ल्यावण जा रही ए मेरी सास राणी सब सखियों के संग और तोड़ो तोड़ो री ननदी मेहंदी के पात जैसे हरियाणवी लोकगीतों पर अत्यंत मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए।
रोहतक से विख्यात नृत्यांगना लीला सैनी और उनके दल एलकेएम फाउंडेशन ने कई बेहतरीन लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हाथों में रंग-बिरंगे बीजणा और सिर पर चमचमाती टोकणी रख सधे हुए नृत्यों ने प्रदेश की नारी के पारंपरिक सौंदर्य और उल्लास को मंच पर जीवंत कर दिया।
भिवानी से सुभाष पपोसा के दल ने बुलंद आवाज से पारंपरिक लोकगीतों की महफिल सजाई। विशेष लोकगीत रात ना सोई रे किरसन तेरे चाव की मारी, सावन मां झूल घली कामण की और तोड़े पत्ते पिपलां के पर दर्शकों के साथ मुख्य अतिथि लोक सेवा आयोग की सदस्या ज्योति बैंदा, उपाध्यक्ष महेश जोशी और अन्य महिला दर्शक भी झूम उठे। ज्योति बैंदा ने कहा कि तीज का त्योहार संस्कृति की जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। तीज मिट्टी की खुशबू, प्रकृति, भाईचारे का प्रतीक है।
उपाध्यक्ष जोशी ने कहा कि मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोक कलाओं से रूबरू कराना रहा। बैंदा ने पारंपरिक हरियाणवी व्यंजन गर्म गुलगुले और खस्ता सुहाली का स्वाद चख उत्सव की सराहना की। विशेष रूप से लगाए पारंपरिक पींघ का भी आनंद लिया। अतिथि और कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व जिला संपर्क अधिकारी देवराज सिरोहीवाल, भारती धीमान, आशा सिंगला, किरण गर्ग, सुरेखा, हरिकेश पपोसा, शिवकुमार किरमच सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमी मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र। मंच पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करती लोक कलाकार। स्वयं
कुरुक्षेत्र। मंच पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करती लोक कलाकार। स्वयं
कुरुक्षेत्र। मंच पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत करती लोक कलाकार। स्वयं