कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अपनी कला दिखाते मनजीत सिंह। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शिल्पकार न केवल शिल्प कला का प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि स्वरोजगार स्थापित करने के लिए युवाओं के प्रेरक भी बने हुए हैं। ब्रह्मसरोवर के तट पर वे बिजली के चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों को बेच ही नहीं रहे हैं बल्कि दूसरों को मिट्टी के बर्तन बनाना सिखाकर इस कला में पारखी बना रहे हैं।
गोहाना के गांव भावड़ से आए मनजीत सिंह के लिए मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी काम है। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी यही काम करते आए हैं लेकिन उन्होंने आधुनिकीकरण के इस जमाने में और प्रतियोगिताओं के दौर में अपने बर्तनों को नया रूप देते हुए इन्हें बाजार में उतारा है। कोई भी इनके पास मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सीख सकता है। यह शिल्पकार कई साल से ब्रह्मसरोवर के तट पर अपने बर्तनों की प्रदर्शनी लगाकर इन्हें बेच रहे हैं। वे अपने पास मिट्टी की तस्वीरों के साथ-साथ मिट्टी के मुखौटे, तुलसी के गमले, रिंग बेल फूलों के गमले, वॉटर बॉल इत्यादि रखे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले मिट्टी के बर्तन सीधे चाक पर बनाए जाते थे लेकिन आधुनिक जमाने में अपने आप को स्थापित करना बड़ी चुनौती है, इसलिए वे इन्हें नए-नए आकार देकर और इन पर पॉलिश मिट्टी की पॉलिश करके इन्हें साफ-सुथरा बनाते हैं ताकि यह और अधिक आकर्षक बन सके। उनके इस कार्य में परिवार के अन्य सदस्य भी उनका हाथ बंटाते हैं। वे अपने यहां बिजली के चाक भी बनाते हैं जिसके ऊपर मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं। उनके पिता और उनके पूर्वज पहले मिट्टी के बर्तनों को हाथ के चक्र पर बनाते थे लेकिन आज के समय में यह चाक बिजली का बनाया हुआ बाजार से मिलता है।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अपनी कला दिखाते मनजीत सिंह। विज्ञप्ति