संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 30 अक्तूबर से शुरू होने वाले रत्नावली महोत्सव को इस बार और भी व्यापक स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोत्सव में एक नवंबर को शिरकत कर सकती है। इस दौरान महोत्सव में भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रपति के संभावित आगमन को लेकर केयू प्रशासन ने तैयारियां शुरु कर दी है।
रत्नावली महोत्सव में उनके शामिल होने से इसकी गरिमा बढ़ने के साथ-साथ हरियाणवी लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच मिलने की उम्मीद है। एक नवंबर को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का भी कार्यक्रम है। महोत्सव में राज्यपाल प्रो. असीम घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल होंगे। ऐसा पहली बार होगा, जब रत्नावली में राष्ट्रपति शामिल हो सकते हैं।
स्टॉल सजने लगे, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तैयारी तेज
दौरे की तैयारियां भी शुरु कर दी गई है। कई विधाओं और कार्यक्रम में बदलाव भी किए गए। एक नवबंर को होने वाले कार्यक्रम भी बदले गए है। वहीं राष्ट्रपति के आगमन की सूचना के बाद एक खास प्रदर्शनी लगाई जा रही है। महोत्सव के लिए मुख्य मैदान में क्राफ्ट विला और खानपान के स्टॉल तैयार किए जा रहे हैं। दुकानों के लिए बांस-बल्लियां लगाई जा रही हैं। विद्यार्थी हरियाणवी सांग, लूर नृत्य और रागनी सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रिहर्सल कर रहे हैं। मंच, अतिथियों के बैठने, सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं पर भी काम चल रहा है। महोत्सव 30 अक्तूबर से 2 नवंबर तक चलेगा।
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मीडिया चौपाल से लोक संस्कृति का होगा प्रचार
इस बार महोत्सव में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया की अगुवाई में हरियाणवी मीडिया चौपाल आयोजित की जाएगी। जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान इसमें सहयोग करेगा। चौपाल में हरियाणा के लोकगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ग्रामीण जीवन को पॉडकास्ट, रील, फोटोग्राफी और डॉक्यूमेंट्री से प्रस्तुत किया जाएगा।
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पहले दिन शुरू होंगी ये सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्तूबर को ऑडिटोरियम में हरियाणवी लोक नृत्य, पॉप सांग और लोकगीत प्रतियोगिताएं होंगी। आरके सदन में हरियाणवी भजन और युगल रागनी, ओपन एयर थिएटर में एकल नृत्य और रागनी प्रतियोगिताएं हाेंगी। वहीं, सिनेट हॉल में हरियाणवी भाषा और बोली से संबंधित प्रतियोगिताएं होंगी। 31 अक्तूबर को महिला एकल नृत्य, हरियाणवी लोक नृत्य, फैशन शो, लोक ऑर्केस्ट्रा, लोकगीत और हरियाणवी गजल की प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा हरियाणवी स्किट, रॉक बैंड, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और सांग मंचन भी होगा। पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी में बोहिया, डोली, पिंजरा, बर्तन और अन्य सांस्कृतिक वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव के अंतिम दिन 2 नवंबर को हरियाणवी समूह नृत्य और रागनी प्रतियोगिता होंगी, जिसके बाद पुरस्कार वितरण किया जाएगा।
रत्नावली महोत्सव में इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आने की संभावना है, लेकिन प्रोटोकॉल के तहत अभी तक आधिकारिक कार्यक्रम नहीं मिल पाया है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारियां कर रहा है। अगर राष्ट्रपति इस बार महोत्सव में पहुंचती हैं तो इससे महोत्सव की पहचान और बढ़ेगी।
- प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलपति, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय।
कुरुक्षेत्र। रत्नावली को लेकर स्टाल की तैयारियां करते श्रमिक। संवाद