कुरुक्षेत्र। राजेंद्र नगर स्थित श्रीअद्वैत स्वरूप अनंत आश्रम नंगली वाली कुटिया में श्रीराम कथा के तहत दूसरे दिन प्रवचन दिए गए। शुभारंभ आश्रम के संचालक संत प्रकाश पुरी व संत अगम पुरी ने किया। पूरा पंडाल हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
कथाव्यास संत वीणा पुरी ने कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, हृदय परिवर्तन करने वाली कथा है। सुख और दुख कर्मों पर आधारित हैं। अच्छे और बुरे कर्मों का फल निश्चित मिलता है। माता सती के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक झूठ के कारण उन्हें वर्षों तक तपस्या करनी पड़ी। उन्होंने गृहस्थ जीवन में आपसी विश्वास और सत्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने शिव विवाह के प्रसंग में कहा कि जब भगवान शिव की बरात निकली तो भूत-प्रेतों के वेश में बच्चों ने जमकर नृत्य किया। संत निर्विकार पुरी, संत संतोष पुरी, संत त्याग पुरी, संत वेदांत पुरी, संत सनातन पुरी, संत दयालपुरी, संत सहज पुरी, संत विवेक पुरी, संत देवांश पुरी, संत यथार्थ पुरी, संत सिद्धार्थ पुरी, प्रवक्ता महात्मा दिव्यानंद, महात्मा गोपालानंद, महात्मा रामानंद और महात्मा हरदेवानंद आदि संतों ने भी संगत का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश, गुलशन बाजाज, वेदप्रकाश फौजी, रजत कालड़ा, पंडित अंकित शर्मा, विजय गाबा और राजीव चावला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र। नंगली वाली कुटिया में श्रीराम कथा के दौरान प्रवचन करते संत वीणा पुरी। विज्ञप्ति