कुरुक्षेत्र। जाट धर्मशाला में मनाया गया शहादत दिवस। संवाद
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में बुधवार को श्रद्धा, गौरव और देशभक्ति के वातावरण में चार साहिबजादों का शहादत दिवस और वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल जी का बलिदान दिवस गरिमामयी रूप से मनाया गया। कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपराओं के अनुसार यज्ञ-हवन से हुआ जिसमें देश की अखंडता, सामाजिक सौहार्द, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और समाज की समृद्धि के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान और महाराजा सूरजमल जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सभा एवं धर्मशाला प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद ने कहा कि महाराजा सूरजमल न केवल महान योद्धा थे बल्कि वे 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने वाले दूरदर्शी, न्यायप्रिय और कुशल शासक भी थे। उन्होंने युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता पूर्व वाइस चांसलर रणपाल तहलान ने कहा कि चार साहिबजादों की शहादत विश्व इतिहास में धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। विचार गोष्ठी में कंवरजीत भारद्वाज, रमेश मराठा, डॉ. संतोष दहिया, मदनलाल सारसा, डॉ. संदीप, आदित्य मलिक, अरुण पंडित और आर्य सुलेख सिवाह ने अपने विचार रखे। इस मौके पर उपप्रधान बनी सिंह ढुल, सचिव हरिकेश, जितेंद्र सहित कमेटी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।