हर माता पिता का सपना होता है की उसे अपने बच्चों के लिए अच्छा घर वर मिले। समय पर उनकी शादी अच्छे से शुभ मुहूर्त में हो लेकिन इस साल में अच्छे मुहूर्त कम ही रहे। इस वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्तों को लेकर काफी विभिन्न विचार चले आ रहे है। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया की नया संवत लगते ही 29 अप्रैल को सुबह 3:50 मिनट पर शुक्र का तारा डूब गया और विवाह, यज्ञोपवित आदि शुभ कार्यों पर विराम लग गया। अब शुक्र 9 जुलाई को सुबह 05:40 बजे पश्चिम में उदय होंगे।
शुक्र के उदय होने से विवाह आदि शुभ कार्य हो सकेंगे। लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं चलेगा। हालांकि, 13 जुलाई को भड़ल्या नवमी और 15 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दो विवाह आदि मांगलिक कार्य होने के बाद चार माह के लिए विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
15 जुलाई को देवशयनी एकादशी से देवता सो जाते हैं और 11 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर देव उठते हैं तो शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं। भड़ल्या नवमी का साहा नौ रेखीय होगा। देवशयनी एकादशी का अबूझ सावा रहेगा। फिर देवउठनी एकादशी 11 नवंबर से ही यज्ञोपवीत विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू होंगे और करीब एक माह तक शहनाइयां बजेंगी।
इसके बाद 15 दिसंबर को मीन मल मास लगने से अगले साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति से ही शुभ कार्य हो सकेंगे। 11 नवंबर से 12 दिसंबर तक एक महीने में 11 सावे के शुभ लग्न में पाणिग्रहण संस्कार होंगे। इनमें भी 6 सावे नौ रेखीय रहेंगे। तीन विवाह मुहूर्त सात रेखीय, एक आठ-एक आठ छह रेखीय विवाह मुहूर्त रहेंगे।
नवम्बर में 11, 12, 16, 23, 24, 25, 26, 30 और दिसंबर में 1, 3, 4, 8, 9, 10, 12, 13 विवाह के शुभ मुहूर्त रहेंगे लेकिन जो लोग चातुर्मास को ज्यादा महत्व नहीं देते उनके लिए अगस्त सितंबर अक्टूबर में भी कुछ विवाह के मुहूर्त बनते हैं