कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी ने रविवार को सत्संग प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि हमारे शरीर और ब्रह्मांड का गहरा संबंध है। यह शरीर पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से जुड़ा है। यह केवल भौतिक तत्व नहीं हैं, ये हमें जीवन, चेतना और आध्यात्मिक संतुलन की गहरी सीख देते हैं। उन्होंने बताया कि पंचतत्व हमारे शरीर की संरचना के आधार हैं। ये तत्व आपस में जुड़े हुए हैं और इनका संतुलन स्वास्थ्य, जीवन शक्ति एवं आध्यात्मिक सामंजस्य बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इन तत्वों में से किसी भी एक की अधिकता या कमी से शारीरिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
महंत ने बताया कि पृथ्वी शरीर की हड्डियों, मांसपेशियों और स्थायित्व का प्रतिनिधित्व करती है। यह सभी तत्वों के विकसित होने का आधार है। जल रक्त, शारीरिक तरल पदार्थ और जीवन की तरलता का प्रतिनिधित्व करता है। मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जल से बना है। इसी प्रकार अग्नि शरीर की ऊर्जा, गर्मी और पाचन प्रक्रियाओं का प्रतीक है। शरीर की ऊष्मा अग्नि तत्व से आती है। वायु श्वास, संचार और जीवन की गति का प्रतिनिधित्व करती है। प्राणवायु के बिना जीवन संभव नहीं है।