कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आज अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। संघ की जड़ें कुरुक्षेत्र जिले में भी गहरी हैं, जहां इसकी शुरुआत करीब नौ दशक पहले हुई थी।
वर्ष 1937 में प्रदेश की पहली शाखा कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में स्थापित हुई थी। यह शाखा स्वयं संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार ने लगाई थी।
डॉ. हेडगेवार जब 1937 में रेलमार्ग से शाहाबाद से गुजर रहे थे, तब स्थानीय स्वयंसेवक नंद किशोर गुप्ता के आग्रह पर उन्होंने रेलवे स्टेशन पर ही पहली शाखा का संचालन किया। यही क्षण हरियाणा में संघ कार्य की नींव रखने वाला ऐतिहासिक दिन बन गया। धीरे-धीरे यह विचार यात्रा कुरुक्षेत्र जिले के गांव-गांव तक फैलती चली गई और आज जिले में 172 शाखाएं सक्रिय हैं।
संघ के 25 वर्ष तक स्वयंसेवक रहे डॉ. ऋषि पाल मथाना ने बताया कि आज जिले में 172 शाखाएं सक्रिय हैं। जिले के सभी 50 मंडल और 65 बस्तियों में स्वयंसेवक नियमित शाखाओं और सामाजिक सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। इन शाखाओं में छोटे बाल स्वयंसेवक से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक प्रतिदिन राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के संस्कार सीखते हैं। जिला संघ चालक संजय शर्मा ने बताया कि 1937 में एक रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ यह सफर आज कुरुक्षेत्र के हर कोने तक पहुंच चुका है। यह संघ के 100 वर्षों की सशक्त यात्रा का जीवंत प्रतीक है।
1946 में गोलवलकर ने रखी थी गीता विद्यालय की नींव : आरएसएस के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव राव गोलवलकर (गुरुजी) भी कुरुक्षेत्र से गहरा संबंध रखते थे। उन्होंने 1946 में रेलवे रोड स्थित श्रीमद्भगवद्गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की नींव रखी थी। इसी भवन में संघ की गतिविधियां निरंतर संचालित होती रही हैं।
विद्यालय के एक कोने में बना गीता रंगम भवन आज भी संघ का जिला कार्यालय है। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस ऐतिहासिक भवन को रंगीन रोशनी से सजाया गया था।
कुरुक्षेत्र। डॉ. ऋषि पाल मथाना।
कुरुक्षेत्र। डॉ. ऋषि पाल मथाना।
कुरुक्षेत्र। डॉ. ऋषि पाल मथाना।