संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। इस्माईलाबाद। तीसरे दिन मारकंडा का जलस्तर घटकर दो हजार क्यूसेक तक रहा तो जलबेहड़ा बांध के बाद शुक्रवार को नैसी तटबंध भी दुरुस्त हो पाया। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है लेकिन गांव नैसी, टबरा व आसपास के गांव में जलभराव से हुए तबाही की निशान भी दिखाई देने लगे हैं। सड़क से लेकर पशु चारा, धान की फसल तक नष्ट हो गई है, जिसके चलते किसानों के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
मंगलवार को पहले नैसी तटबंध और फिर जलबेहड़ा में बांध टूटने से निकले पानी ने विभिन्न सड़कों को खस्ताहाल कर दिया है। खासकर गांव नैसी से टबरा की ओर जाने वाली सड़क के कई हिस्से पानी के साथ बह गए। जैसे-जैसे पानी कम हो रहा है तो धान की फसल दिखाई देने लगी है। किसानों के मुताबिक अधिकतर धान की फसल खराब हो चुकी है। जहां पर अभी भी जलभराव है वहां पर फसल में और ज्यादा नुकसान का अनुमान है। किसानों के सामने हरे चारे का संकट भी पैदा हो गया है। बालापुर व जंधेडी गांव तक पहुंचा पानी ः तटबंध टूट कर पिछले तीन दिन से खेतों में बहता रहा मारकंडा नदी का पानी गांव टबरा के बाद वीरवार दोपहर बाद मडाडो तथा देर रात्रि गांव जोधपुर, जंधेडी व बालापुर में पहुंच गया। गांव बालापुर की सैकडों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। शुक्रवार सुबह पानी कम होने लगा है, जिसके चलते यहां धान की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।