संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने दोषी व शिकायतकर्ता के बीच समझौता होने के बाद निचली अदालत के दो साल पुराने फैसले को पलट दिया है। दोषी पर शाहाबाद की तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नीलम कुमारी की अदालत ने नौ अक्टूबर 2023 के दोषसिद्धि का निर्णय और 10 अक्टूबर 2023 को सजा का आदेश दिया था। समझौते के बाद दोषी ने इसके खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर अदालत ने सुनवाई करते हुए दोषी ठहराए गए गुरजंत सिंह को धारा 138 के तहत आरोपों से बरी कर दिया गया।
मामला जसवीर सिंह की ओर से दायर शिकायत से संबंधित था जिसमें गुरजंत सिंह को चेक बाउंस के लिए दोषी ठहराया गया था। उन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास और शिकायतकर्ता जसबीर सिंह को 1,50,000 रुपये की चेक राशि का भुगतान करने की सजा सुनाई थी। भुगतान में चूक होने पर तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा का प्रावधान था। सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने सूचित किया कि उन्होंने आपसी सहमति से सौहार्दपूर्ण समझौता कर लिया है। अपीलकर्ता दोषी गुरजंत सिंह ने समझौता पत्र के अनुसार शिकायतकर्ता जसबीर सिंह को पूरी तय राशि का भुगतान कर दिया है और कोई बकाया राशि शेष नहीं है। शिकायतकर्ता जसबीर सिंह ने अपीलकर्ता को बरी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों ने अपने बयानों में समझौते की पुष्टि की और अपराध को समन्वय करने की प्रार्थना की। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के बयानों और आवेदन के आधार पर माना की दोषी का अपराध परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत समन्वय योग्य है। इसलिए दोनों को समझौता करने की अनुमति दी जा सकती है। इसके परिणामस्वरूप निचली अदालत के नौ अक्टूबर 2023 के दोषसिद्धि के निर्णय और 10 अक्टूबर 2023 सजा के आदेश को रद्द कर दिया गया। अपीलकर्ता गुरजंत सिंह को धारा 138 के तहत आरोपों से बरी कर दिया गया।