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शिकायत केंद्रों पर नहीं बिजली कर्मी, ग्रामीण खुद ठीक करते हैं फाल्ट

Sun, 15 May 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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बिजली निगम द्वारा शहर की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र में भी शिकायत केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन इन शिकायत केंद्रों पर उपभोक्ताओं के समस्याओं के समाधान के लिए बिजली कर्मी नहीं हैं। ऐसे में जब लाइनों में फाल्ट आता है तो लोगों द्वारा शिकायत करने के बाद भी ठीक करने कोई बिजली कर्मी नहीं पहुंचता। बिजली कर्मियों की कमी के वजह से सबसे अधिक परेशानी तो धान के सीजन में किसानों को होती है।
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जब एक बार बिजली गुल होने से धान सूख जाए तो फिर धरती की दरारों को भरने किसानों के पसीने छूट जाते हैं। इसलिए जब भी लाइन में फाल्ट आता है, तो किसान व ग्रामीण खुद अपनी जान जोखिम में डालकर खंभों पर चढ़ जाते हैं। बिना परमिट के काम करने से कई बार किसान करेंट हादसों का शिकार होते हैं। इन तमाम परेशानियों के बाद भी बिजली निगम शिकायत केंद्रों को दुरुस्त नहीं किया है।


धान के सीजन से पहले अब किसानों को बिजली कटों का डर सताने लगा है, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार भी हालात में कोई ज्यादा सुधार नहीं है, इससे इस बार भी ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ना तय है। बता दें कि जिले में कुल 1858 बिजली कर्मचारी हैं, 4.72  लाख उपभोक्ता हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम किस प्रकार से कर्मियों की कमी झेल रहा है।
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ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए भटक रहे सैकड़ों किसान
जिले भर में करीब 250 से अधिक किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन पेंडिंग पड़े हैं। आज से करीब चार वर्ष पहले जिन किसानों ने पूरी फीस के साथ आवेदन किया था,

वो भी अभी तक कनेक्शन के लिए निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। यही नहीं किसानों को ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए भी इसी तरह चक्कर लगाने पड़ते हैं।


छह गांवों के शिकायत केंद्र पर सिर्फ  एक बिजली कर्मी
करनाल डिवीजन के छह गांव कलवेहड़ी, मंगलपुर, दलानपुर, बुढ़ाखेड़ा ,प्रीतमपुरा, दलानपुर रोड व 50 से अधिक डेरों की बिजली संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सिर्फ एक शिकायत केंद्र बनाया गया है, उसपर भी सिर्फ एक बिजली कर्मी तैनात है, जिनके भरोसे छह गांव के करीब 15 हजार घरेलू उपभोक्ता व करीब  2500 किसान हैं।

धान के सीजन में हर बार किसान बिजली ठीक करवाने के लिए धरने प्रदर्शन करते हैं। ऐसे ही कुछ हालात, रंबा, दरड़, कुराली, अब्दुल्लापुर, टीकरी, कै लास, कर्ण विहार, बंसत विहार, संगोही, संगोहा, बड़ागांव, समौरा, कुुंजपुरा, नली पार व नली कलां आदि गांव के तीन शिकायत केंद्रों पर सिर्फ चार कर्मचारी तैनात हैं, जो 24 घंटों की ड्यूटी दे रहे हैं।


मेंटेनेंस के अभाव में पांच साल भी नहीं निकालते ट्रांसफार्मर


बिजली निगम के पास जरूरत के मुताबिक पर्याप्त कर्मचारी नहीं है। इसी वजह से ट्रांसफार्मरों कीं समय पर मेंटेनेंस नहीं हो रही है। समय पर मेंटेनेंस न होने की वजह  से 12 से 15 वर्ष तक चलने वाले ट्रांसफार्मर तीन या चार वर्ष में ही कंडम हो रहे हैं। निगम रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले साल गर्मी के सीजन में जिले में 1325 ट्रांसफार्मर जले थे।

जिसे निगम द्वारा अपने खर्चे पर दोबारा लगाया गया था। इसके अलावा इंसुलेटर व ट्रांसफार्मरों की रीले ब्रेकर में तकनीकी खराबी आने कारण भी समय पर मेंटेनेंस न होना है।


इस बारे में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि बिजली निगम किसानों का शोषण कर रहा है। कई कई  साल से किसान बिजली कनेक्शन लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारियों बिना रिशवत के काम नहीं करते। इसके अलावा, गांवों में बिजली कर्मी फाल्ट ठीक करने नहीं पहुंचते, इसलिए मजबूरी में किसानों को खुद ही तार ठीक करनी पड़ती हैं, जिसके कारण कई बार किसानों को हादसों का शिकार होना पड़ता है। निगम को चाहिए कि गांवों में और खेतों की लाइनों पर बिजली कर्मचारी तैनात करें, ताकि सीजन में किसानों को परेशानी न आए?

कर्मचारी भर्ती के लिए प्रबंधन से मांग की गई

बिजली निगम में फिलहाल कर्मचारियों की संख्या जरूरत के हिसाब से कम है, लेकिन इसके बावजूद भी एडजेस्टमेंट से काम चलाया जा रहा है। कर्मचारियों की भर्ती के लिए निगम प्रबंधन से मांग की गई है। गर्मी के सीजन में उपभोक्ताओं को शेड्यूल के मुताबिक बिजली आपूर्ति मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा।
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जेके कांबोज, एसई, बिजली निगम करनाल।
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