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Kurukshetra News: विदेश भेजने का धंधा बना परिवार का काल

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सुनील धीमान
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कुरुक्षेत्र। गांव यारा में अपने ही माता-पिता और पत्नी की हत्या के बाद खुद भी आत्महत्या करने के बाद गांव सन्न है। माना जा रहा है कि इसका कारण लोगों को विदेश भेजने का दुष्यंत का धंधा है। इसके चलते वह लेनदेन में फंस गया।
पुलिस ने एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। इसमें लिखा है कि परिवार में कोई दुखी न हो, इसलिए सभी साथ जा रहे हैं। सभी को राम-राम...। हालांकि अभी इस सुसाइड नोट की भी जांच होनी है। इसमें पुलिसकर्मियों पर टार्चर करने के आरोप लगाए हैं। नैब सिंह परिवार के साथ रह रहा था। नैब सिंह के कुनबे में करीब साढ़े चार एकड़ जमीन हिस्से आई थी। नैब सिंह अपने पोते केशव के साथ खेती करता था। दुष्यंत शाहाबाद कोर्ट में प्यादा था। कुछ समय पहले दुष्यंत ने विक्रम (सुसाइड नोट में जिक्र) के साथ लोगों को विदेश भेजने का काम शुरू किया था। यही धंधा परिवार के लिए काल साबित हुआ। हालांकि ग्रामीण बाहरी हमलावरों के वारदात को अंजाम देने की बात कर रहे थे। सुसाइड नोट के मुताबिक विक्रम लोगों से लिए पैसे अपने पास रखता था, जबकि दुष्यंत फाइल लगाने का काम करता था।
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विक्रम ने किसी चंद्रभान से पैसे लेकर काम नहीं किया था। इस लेनदेन में दुष्यंत फंस गया और उसने सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। इधर, दुष्यंत के लेनदेन की भनक उसके परिवार को भी मिल चुकी थी। पिता ने दुष्यंत को काम छोड़ने की सलाह दी थी। दुष्यंत ने विक्रम और उसके परिवार को हत्या और आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का जिम्मेदार ठहराया है।
विक्रम कनाडा में रहता है। विक्रम की वजह से चंद्रभान, उसका बेटा सलिंद्र, जमाई संदीप और बेटी कोमल उसे और उसके परिवार को परेशान करते थे। उन्होंने हमारी झूठी दरखास्त पुराना शहर सोनीपत में दी थी। इसमें चौकी इंचार्ज रोहित और शिवमुनि ने भी उसे बहुत टॉर्चर किया।
धनपत सिंह मलिक ने उसे अलग से ले जाकर जान से मारने और उसके सारे परिवार को उठाने की धमकी देता था। इससे तंग आकर उसने 16 अगस्त को छह लाख और दो लाख के दो चेक उनको दिए थे, जबकि यह राशि विक्रम के पास गई थी। इनका कोई बकाया न देना था। उसके पास जो दो लाख संदीप के आए थे। वो भी उसने 13 जून तक लौटा दिए। उसके बाद उसने 50 हजार और 32 हजार रुपये भी 19 जून को उनके मांगने पर दे दिए थे। फैसले के बाद भी संदीप उसे परेशान करता रहा और उससे दो लाख रुपये और मांगता था।
सुरेंद्र उर्फ सलिंद्र तंग करता था और एक बार घर आकर धमकी दे गया था। इससे परेशान होकर ये कदम उठाने की बात कही। मेरे बाद इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इन सब की वजह से मैं और मेरा परिवार आज खत्म हो गया। मेरा जीना मुश्किल हो गया था। विक्रम हर रोज लारे लगाता था, जो कि उसने मेरे पैसे देने थे। उसने जिसकी भी फाइल लगाई है, उन सब के पैसे उसके पास गए हैं। विक्रम पैसे देने में आनाकानी कर रहा है।

ऑर्डर पर मंगाई दवा और लिखा राम-राम : सुसाइड नोट के अनुसार दुष्यंत ने यूपी के एक डॉक्टर से दवा मंगाई थी। यह डॉक्टर ऑनलाइन दवा भेजता था। सुसाइड नोट में डॉक्टर के मोबाइल नंबर का जिक्र है। इसमें लिखा कि व्हाट्सएप पर उसने ही मेरे को आर्डर आईडी पर डिलिवरी से दवा भेजी थी। लिखा कि परिवार में कोई दुखी न हो, इसलिए सभी साथ जा रहे हैं। सभी को राम-राम।
चचेरे भाई के खाते में डाले पांच हजार : थाना शाहाबाद में दर्ज शिकायत में साहिल निवासी यारा ने बताया कि सुबह करीब साढ़े सात बजे उसके ताऊ नैब सिंह ने पांच हजार रुपये उसके खाते में डाले थे। उसने ताऊ को काॅल की तो उनका मोबाइल बंद था। उसने अपने चचेरे भाई दुष्यंत को कॉल करके पूछा तो उसने कुछ सामान मंगाने की बात बताई। वह कुछ देर बाद ताऊ के घर आया तो गेट बंद था।

पोते को चलाना सिखाया ट्रैक्टर-कार : पड़ोसी जगदीप सिंह ने बताया कि नैब सिंह अक्सर अपने पोते केशव को खेती के बारे में बताता था। नैब सिंह खुद अपनी जमीन पर खेती करता था। नैब सिंह ने ही अपने पोते को कार और ट्रैक्टर चलाने का प्रशिक्षण दिया था।
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आरोपी ने अस्पताल में तोड़ा दम : अनहोनी का शक होने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो दुष्यंत और उसकी बहू की सांसें चल रहीं थी। पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां दुष्यंत की पत्नी की मौत हो गई कुछ देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया। (संबंधित खबर मुख्य संस्करण में)
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