कुरुक्षेत्र। आगामी बजट से पहले जिले में विकास की तीन बड़ी मांगें जोर पकड़ रही हैं। सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की मांग है कि कुरुक्षेत्र व सीएम सिटी लाडवा के लिए रिंग रोड और बाईपास की घोषणा की जाए। मारकंडा नदी से होने वाले बाढ़ नुकसान का स्थायी समाधान किया जाए तथा एक आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जाए।
सबसे प्रमुख मांग शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए रिंग रोड और बाईपास निर्माण की है। धार्मिक नगरी होने के कारण यहां सालभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही रहती है। त्योहारों और मेलों के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। कुरुक्षेत्र व्यापार मंडल के प्रधान फतेह चंद गांधी का कहना है कि रिंग रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और कारोबार को भी गति मिलेगी।
दूसरी बड़ी मांग मारकंडा नदी से हर वर्ष होने वाले बाढ़ नुकसान को रोकने के लिए स्थायी प्रबंध की है। मारकंडा दरिया के साथ सटे गांव तंगौर, कठवा, कलसाना, मुगल माजरा, गुमटी, मलिकपुर, अरूप नगर, मदनपुर, मोहनपुर में हर वर्ष मारकंडा दरिया के पानी की मार रहती है। इसी कारण और बाढ़ के डर से गांव मलिकपुर से कईं परिवार पलायन कर चुके हैं। इन गांवों को मारकंडा दरिया के पानी से बचाने के लिए इनके आस-पास भी बांध बनाया जाना बेहद जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम में फसलें और पशुधन प्रभावित होते हैं। यदि पक्का तटबंध, जल निकासी प्रणाली और मजबूत ड्रेनेज व्यवस्था बनाई जाए तो हजारों एकड़ भूमि को बचाया जा सकता है।
तीसरी मांग औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना को लेकर है। युवा नेता भारत बराड़ का कहना है कि जिले में बड़े उद्योग न होने से रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है। यदि संगठित औद्योगिक एरिया विकसित किया जाए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। शिक्षाविदों का मानना है कि उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच समन्वय से कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। जिले के प्रमुख नागरिकों का कहना है कि बजट में इन तीनों मांगों को शामिल किया जाना समय की आवश्यकता है। इससे शहर का सुनियोजित विकास, पर्यावरण सुरक्षा और युवाओं का भविष्य मजबूत होगा।
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विधानसभा में उठाया मुद्दा, बजट में हो प्रावधान
शाहाबाद के विधायक रामकरण काला ने बताया कि उन्होंने मारकंडा नदी में खनन और बांध निर्माण का मुद्दा विधानसभा सत्र में उठाया है। हालांकि अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन वे इस मुद्दे को फिर से सदन में उठाने का प्रयास करेंगे। सरकार को इसके स्थाई प्रबंध के लिए बजट में प्रावधान करना चाहिए। इससे सैकड़ों किसानों और लोगों को मार झेलनी पड़ती है।
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20 साल आगे की जरूरतें ध्यान में रखकर बने बाईपास
थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि मारकंडा नदी से होने वाले बाढ़ नुकसान का स्थायी समाधान हेतु बजट में प्रावधान किया जाए तथा एक आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हो। कुरुक्षेत्र से बाईपास निकालते समय शहर के भविष्य के विकास, बढ़ती आबादी और संभावित औद्योगिक इकाइयों को ध्यान में रखा जाए। धार्मिक नगरी होने के कारण यहां पर्यटकों की निरंतर आवाजाही रहती है। अधिक खर्च के साथ सुव्यवस्थित मैप तैयार किया जाए।
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एनएचएआई के तीन प्रस्ताव, किसानों को न हो नुकसान
पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने बताया कि एनएचएआई ने कुरुक्षेत्र बाईपास के लिए तीन प्रस्ताव दिए हैं। दो मार्ग ज्योतिसर से उमरी होते हुए मथाना तक और एक खानपुर कौलियां मार्ग से प्रस्तावित है। इन पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से राय ली गई है। उन्होंने कहा कि योजना में भवन कम आएं और किसानों को न्यूनतम नुकसान हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। जल्द ही इसकी सौगात नागरिकों को मिलेगी। इसके साथ सीएम सिटी के लोगों को बजट में और भी सौगात मिलेंगी।