कुरुक्षेत्र। हिंदी साहित्य भारती हरियाणा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक का आयोजन प्रेरणा संस्था स्थित रामस्वरूप सभागार में किया गया। इस मौके पर ‘देश में सकारात्मक बौद्धिक वातावरण का निर्माण: हमारा संकल्प’ विषय पर चर्चा की गई। बैठक में हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश डॉ. रवींद्र शुक्ल ने कहा कि आज पूरे विश्व में हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ी है। पूरे विश्व में आज 260 विश्वविद्यालय हिंदी पढ़ा रहे हैं और 28 हजार संस्थाएं हिंदी पढ़ाने का काम कर रही हैं।
सुखद पहलू यह भी है कि समाज में काम करने वाले लोग इससे ज्यादा हिंदी के लिए सक्रिय हैं। साहित्य समाज का दर्पण नहीं मार्गदर्शक है। साहित्य सृजन करता है। आज हिंदी के प्रचार-प्रसार की नितांत आवश्यकता है और हिंदी साहित्य भारती जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत के 50 प्रतिशत से अधिक जिलों और विश्व के 35 देशों में हिंदी साहित्य भारती ने अपनी कार्यकारिणी गठित कर ली है।
महामंडलेश्वर डॉ. शाश्वतानंद ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमें अपने सुनहरे अतीत को याद करने की आवश्यकता है। वही समाज प्रगति कर पाया है, जिसने अपने गौरवशाली इतिहास के साथ जीना सीख लिया है। हमें अपनी भाषा, संस्कृति और संस्कार अपने जीवन में उतारने होंगे, तभी हम समाज का कल्याण करने में सक्षम हो पाएंगे। हिंदी साहित्य भारती हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. रामेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी में काम करने के लिए सरकारी कार्यालय अग्रसर होने लगे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसा पहली बार हुआ है कि हम विदेशी भाषाओं का अनुकरण और अनुसरण करने की जगह अपनी स्थानीय भाषा एवं मातृभाषा का प्रयोग करने पर बल दिया जाने लगा है। हिंदी साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा ने कहा कि हम अपनी भाषा के प्रति कितने गंभीर हैं, इसका चिंतन-मनन अवश्य करना चाहिए। बैठक में संरक्षक जयभगवान सिंगला, महामंत्री डॉ. ऋषिपाल, डॉ. लालचंद गुप्त, प्रो. सीसी त्रिपाठी, डॉ. हुकम सिंह, हिंदी साहित्य भारती के प्रदेश जनसंपर्क संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार सहित प्रदेश भर से आए हिंदी साहित्य भारती हरियाणा के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. ऋषिपाल ने किया।
तीन पुस्तकों का किया विमोचन
बैठक के द्वितीय सत्र में कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, भिवानी, झज्जर एवं प्रदेश के अन्य जनपदों से आए प्रतिनिधियों ने वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आचार्य देवेंद्र देव की पुस्तक ‘शंख महाकाल का’, हिंदी साहित्य भारती के संरक्षक जय भगवान सिंगला की पुस्तक ‘दैवीय चमत्कार मैं और मेरा परिवार’, डॉ. रामनारायण शर्मा की पुस्तक ‘कबीरदास की मानवतावादी समन्वय साधना’ का विमोचन किया गया।