कुरुक्षेत्र। ... साहब दोपहर से पहले स्कूल संभालना होता है और बाद में कोई आसानी से दरवाजा नहीं खोलता। 20 से 30 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी लगाई गई है, जब तक स्कूल की छुट्टी के बाद इतनी दूर पहुंचते हैं तो शाम ढल जाती है और अंधेरे में लोगों के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। ऐसे में न स्कूलों में पढ़ाई पर फोकस हो पाता और न ही जनगणना कार्य आगे बढ़ पा रहा है।
यह जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों का कहना है। वे अपनी परेशानी अधिकारियों के को भी बता रहे हैं लेकिन इसे दरकिनार कर दिया जाता है। ऐसे में अनेक शिक्षक अपनी ड्यूटी हटवाने का भी अनुरोध कर चुके हैं।
कई शिक्षकों ने बताया कि आदेशानुसार वे स्कूल खुलने से पहले व बाद में ही जनगणना कार्य कर सकते हैं लेकिन स्कूल खुलने से पहले संभव नहीं हो पा रहा। बाद में उन्हें संबंधित जगह पर पहुंचते हुए शाम हो जाती है। अगले दिन फिर स्कूल की चिंता हो जाती है। जब लोगों के घरों पर पहुंचते हैं तो कई ऐसे भी मिलते हैं जो काफी समय तक भी दरवाजा नहीं खोलते। वहीं अनेक लोग देर शाम का समय देख तरह-तरह के सवाल खड़े कर देते हैं जिनका जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
शिक्षकों का कहना है कि 30 किलोमीटर दूर अनजान क्षेत्र में देर शाम को मतगणना करना बेहद मुश्किल हो चुका है। उनका अधिकतर समय वहां तक पहुंचने और लौटने में ही निकल जाता है।
तीन ही शिक्षक तीनों की लगा दी ड्यूटी
जिले में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां तीन में से तीन ही शिक्षकों की मतगणना कार्य में ड्यूटी लगा दी गई। इनमें जीपीएस इस्माईलपुर, फौजी कॉलोनी, किरमिच, कंवार खेड़ी, डेरा प्रेम नगर और गोविंदगढ़ सहित कई ऐसे स्कूल शामिल हैं।
500 से 600 घरों की मैपिंग आसान नहीं
अनेक शिक्षकों को अनजान क्षेत्र में 500 से 600 तक घरों की मैपिंग व गणना का जिम्मा सौंप दिया गया है, जो एक माह के दौरान पूरा करना होगा। पर्याप्त समय न होने पर यह आसान नहीं है।
बच्चाें की पढ़ाई पर असर नहीं : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने कहा कि जनगणना कार्य से बच्चों की पढ़ाई पर कोई विपरीत असर पड़ने वाला नहीं है। जनगणना स्कूल समय से पहले व बाद में ही करनी है। एक माह का समय भी पर्याप्त है। अधिकतर शिक्षकों ने मैपिंग पूरी भी कर ली है।
कुरुक्षेत्र। जनगणना कार्य के लिए पहुंचे शिक्षक। संवाद- फोटो : Samvad