केयू शिक्षक संघ (कुटा) कुलपति और अन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के तुरंत बाद दो फाड़ होने की कगार पर पहुंच गया है। बुधवार देर रात शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मीटिंग के बाद बाहर निकला तो कुटा पदाधिकारियों और कुछ शिक्षकों के बीच बहस हो गई। बात बढ़ी तो शिक्षकों ने अभद्र भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शिक्षक आपस में उलझ गए। हालात बिगड़ने पर अन्य शिक्षकों ने हस्तक्षेप कर मामले को उस समय शांत किया। सूत्रों के अनुसार मामला उस वक्त गरमा गया, जब कुलपति के साथ हुई मीटिंग में शामिल कुछ सदस्यों ने कुटा पदाधिकारियों पर उनकी मांगें न उठाने के आरोप लगा दिए। शिक्षकों का कहना था कि वह भूख हड़ताल में शामिल थे, तो उनकी मांग भी उठाई जानी चाहिए थी। अन्य के साथ उनकी मांगों को भी जोरशोर से क्यों नहीं उठाया गया। बता दें कि कुटा ने लगभग डेढ़ सप्ताह तक अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल की। शिक्षकों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होने पर कुलपति और अन्य उच्च अधिकारियों ने हड़ताल कर रहे शिक्षकों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया। इस बैठक के दौरान शिक्षकों और उच्च अधिकारियों के बीच मांगों पर बहुत हद तक एकराय बन गई। लेकिन, कुछ शिक्षक अपनी मांगों पर भी सहमति चाहते थे, पर ऐसा हुआ नहीं। इसके बाद ही हालात बिगड़ गए। साथी शिक्षकों से जब हालात काबू नहीं हुए, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर सभी को वहां से हटा दिया।
ये कहना है कुटा अध्यक्ष का कुटा अध्यक्ष डॉ. परमेश कुमार ने बताया कि बहसबाजी नहीं हुई। शिक्षक आपस में बातचीत कर रहे थे। उनके संगठन की कामयाबी से परेशान किसी शरारती तत्व ने ऐसी अफवाह फैलाई है।