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अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे आयुर्वेदिक कॉलेज के शिक्षक, गैर शिक्षक और चिकित्सक

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श्रीकृष्ण आयुर्वेदिक कॉलेज का सरकारी दर्जा बरकरार रखने की मांग को लेकर शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। स्टाफ के सभी सदस्य श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज शिक्षक संघ की अगुवाई में आयुष विश्वविद्यालय के बाहर धरना पर बैठ गए हैं। हालांकि शिक्षकों ने भावी चिकित्सकों की पढ़ाई जारी रखी और ओपीडी भी प्रभावित नहीं होने दी। सुबह से हड़ताल पर बैठे शिक्षकों को आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान ने शाम को बातचीत के लिए बुलाया। करीब 40 मिनट हुई वार्तालाप में बात सीने नहीं चढ़ी तो शिक्षक वापस हड़ताल पर चले गए। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज का सरकारी दर्जा बरकरार नहीं रखा गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हरियाणा आयुर्वेदिक टीचर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. अशोक राणा का कहना है कि तीन वर्षों से श्रीकृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय में कार्यरत स्टाफ अपना सरकारी अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांग को दरकिनार करते हुए आयुर्वेदिक कॉलेज को आयुष विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने में जुटी है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्थानीय विधायक और आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
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डॉ. राणा ने कहा कि कुलपति ने बातचीत के दौरान शिक्षकों से कहा कि 18 तक विधानसभा सेशन चलेगा, इसलिए तब तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं की जा सकती। शिक्षकों ने कहा कि जिस यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत कॉलेज को विवि में मर्ज किए जाने के प्रयास चल रहे हैं, उस एक्ट में संशोधन कर इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है, लेकिन वीसी ने अब तक सरकार को इसके संशोधन बारे नहीं लिखा है। स्टाफ ने कहा कि प्रदेश में एकमात्र सरकारी आयुर्वेदिक महाविद्यालय है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित करके चिकित्सक बनाया जा रहा है, जबकि अस्पताल में आने वाले मरीजों का निशुल्क उपचार हो रहा है। विवि के अंतर्गत आने के बाद विद्यार्थियों के लिए न केवल शिक्षा महंगी हो जाएगी, जबकि मरीजों को भी बेड, दवा और तमाम सुविधाओं के पैसे देने होंगे। शिक्षकों ने निजी महाविद्यालयों की आयुष विवि की ओर से फीस बढ़ाए जाने की बात भी कही। इससे लोगों की सेवा के लिए खोले गए अस्पताल व महाविद्यालय को सरकारी से डिग्रेड करके उल्टा ऑटोनॉमस बॉडी को सौंप देना गलत होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी महाविद्यालय को भी सरकारी ही रहने दिया जाए और विवि अपना दूसरा महाविद्यालय स्थापित करके उसे चलाए।
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