शिक्षा विभाग की खंड स्तरीय बैठक में वीरवार को बवाल मच गया। अध्यापकों ने खंड शिक्षा अधिकारी पर उनके साथ गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए बैठक बीच में छोड़ दी। इतना ही नहीं बैठक के बाहर आकर अधिकारी के रवैये से खफा सभी शिक्षक बीईओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। आरोप है कि अधिकारी का अध्यापकों के प्रति रवैया सही नहीं है। अधिकारी ने यूनियन के पदाधिकारी सहित अन्य अध्यापकों को न केवल धमकाया, बल्कि उनका अन्य अध्यापकों के सामने अपमान भी किया गया। अधिकारी के खिलाफ दो बजे धरने पर बैठे अध्यापक रात तक नारेबाजी करते रहे, जिसके बाद बीईओ ने उनसे माफी मांगी, जिसके बाद मामला शांत हुआ और अध्यापक धरने से उठे।
जानकारी अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा वीरवार को खंड थानेसर के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्कूलों के मुखिया को बैठक में बुलाया गया था। जिसमें बीईओ द्वारा परिवार पहचान पत्र बनाने और क्विज से संबधित डाटा मांगा गया। अध्यापकों ने अधिकारी को बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के सभी बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं, जिससे उनको बच्चों को पूरी जानकारी न तो दी जाती और न ही उनका पूरा डाटा उपलब्ध हो पाता।
आरोप है कि बीईओ अध्यापकों के इस जवाब से तिलमिला उठीं। ऐसे में ताव में आकर अध्यापकों को बैठक में ही धमका डाला। अधिकारी ने इतना तक कहा कि अगर नहीं काम हो रहा है तो उन्हें काम करवाना भी आता है। अधिकारी के रवैये खफा होकर बैठक में मौजूद सभी शिक्षक सभागार से बाहर आ गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। नारेबाजी शुरू होते ही खंड शिक्षा अधिकारी वहां से गाड़ी लेकर निकल पड़ीं। अध्यापकों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा उनको बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से विभाग के निर्देशों का प्राथमिकता से पालन किया जाता है। आरोप है कि अधिकारी अध्यापकों का सभी के सामने दुर्व्यवहार करके उनका मनोबल गिराने का काम कर रही हैं।
स्कूलों में नहीं संसाधन, कहां से बनाएं परिवार पहचान पत्र
अध्यापकों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा तुगलकी फरमान जारी तो किये जाते हैं, लेकिन उनको पूरा करने के लिए स्कूलों में पूरे संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए जाते। प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के परिवार पहचान पत्र बनाने के लिए न तो कंप्यूटर और न ही प्रिंटर हैं। ऐसे में बिना संसाधनों के बच्चों के परिवार पहचान कैसे बनाए जा सकते हैं। प्राथमिक स्कूलों की मुखिया द्वारा बच्चों के परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए फार्म भरे हुए हैं, लेकिन आईडी बनवाने के लिए कोई नहीं आता। ऐसे में अधिकारियों द्वारा अपनी गलतियों को छुपाने के लिए अध्यापकों के सिर दोष मड़ना सरासर गलत है।
देर शाम तक चलती रही नारेबाजी, नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में देर सायं तक अध्यापकों का धरना जारी रहा, लेकिन पांच बजे तक भी कोई भी अधिकारी अध्यापकों के बीच उनका पक्ष सुनने नही पहुंचा था, जिससे अधिकारी के रवैये से खफा अध्यापक धरने पर ही डटे रहे। मामले को बढ़ता देख उप जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक के साथ डीईओ मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे बैठक के बाद डीईओ ने शिक्षकों से माफी मांगी। जिस पर शिक्षकों का गुस्सा शांत हुआ और धरने से उठ गए।
अधिकारियों की प्रताड़ना नहीं की जाएगी सहन : टंडन
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान राजेंद्र टंडन ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी थानेसर का रवैया अध्यापकों के प्रति सही नहीं है। ऐसे में जिले के कोई भी अध्यापक बेवजह अधिकारियों की प्रताड़ना को सहन नही करेंगे।
भविष्य में सब मिलकर करेंगे काम : बीईओ
बीईओ संतोष शर्मा ने कहा कि बैठक के दौरान एक शिक्षक का रवैया ठीक नहीं था, जिस पर पहले उसे समझाया लेकिन वह नहीं माना, फिर जब दोबारा समझाने की कोशिश की तो मामला बिगड़ गया। मेरी किसी भी शिक्षक को अपमानित करने की मंशा नहीं थी। शाम को दोनों पक्षों में बातचीत होकर मामला सुलझ गया है। भविष्य में सब मिलकर काम करेंगे।