संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की ओर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के गीता सदन में 16वीं तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय पुनरुत्थान शील भारत के 75 वर्ष विधि एवं न्याय की बदलती रूपरेखा रहा। इस संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए 28 राज्यों के तीन हजार से अधिक अधिवक्ताओं ने पंजीकरण कराया।
दोपहर के सत्र में संगोष्ठी का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जज गुरपाल सिंह, दिल्ली हाईकोर्ट की जज र्स्वण कांता शर्मा, हरियाणा लॉ कमीशन मुकेश गर्ग, परिषद के अध्यक्ष के श्रीनिवास मूर्ति व प्रदेश अध्यक्ष बलदेव राज महाजन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वंदेमातरम् गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत ने अधिवक्ताओं को न्याय व कानून संबंधी जानकारी भी दी। सभी मेहमानों को फल की टोकरी और शंख देकर सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि देश ने 75 सालों के संघर्ष और प्रगति से कई सपनों को साकार किया है। नियम न मानने वाले लोगों के लिए कानून नियम मनवाने का सही तरीका है। कानून नैतिकता को मापने का पैमाना है। धर्म और नैतिकता का आपस में गहरा संबंध है। कानून में इन सभी का ध्यान रखा जाता है।
वहीं सायंकालीन सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू ने संगोष्ठी में ऑनलाइन शिरकत की। उन्होंने कहा कि संविधान हमारी पवित्र किताब है और संविधान से देश चलता है। पहले की सरकारों ने कई काम संविधान के खिलाफ जाकर किए। कोई माहौल बिगाड़ने का काम करता है तो कानून उसे सजा देता है। इस मौके केेयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान राजिंद्र जुनेजा सहित अधिवक्ता मौजूद रहे।
केयू में संगोष्ठी का शुभारंभ करते सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत व अन्य। संवाद- फोटो : Kurukshetra