कुरुक्षेत्र। जिले के खिलाड़ी सुशील ने अपनी पहचान बनाने के बाद अब कोच के रूप में नई पीढ़ी तैयार करने का जिम्मा उठाया है। वर्ष 2012 में वॉलीबॉल से अपना खेल सफर शुरू करने वाले सुशील राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे और कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते। अब वह सरकारी खेल नर्सरी योजना के तहत गांव किरमच में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सुशील गोरा ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने पहली बार जूनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया था। इसी वर्ष घुटने में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें सर्जरी करवानी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2019 में खेल महाकुंभ राज्य प्रतियोगिता और सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसी वर्ष अंतर विश्वविद्यालय शिविर में भी जगह बनाई। वर्ष 2021 में एक बार फिर सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने कोचिंग क्षेत्र में कदम रखा और उसी साल बेंगलुरु से एनआईएस सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। इसके बाद वर्ष 2025 में उन्हें सरकार की खेल नर्सरी योजना के तहत गांव किरमच में वॉलीबॉल नर्सरी का दायित्व मिला। बेहतर प्रदर्शन के चलते वर्ष 2026 में भी सरकार ने किरमच में नर्सरी जारी रखते हुए उन्हें ही दोबारा कोच की जिम्मेदारी सौंपी है।
सुशील गोरा ने बताया कि जब गांव में वॉलीबॉल नर्सरी शुरू हुई थी, तब अधिकांश बच्चों को स्मैशिंग वॉलीबॉल के बारे में भी जानकारी नहीं थी। लगातार प्रशिक्षण और मेहनत का परिणाम है कि पिछले 14 माह में नर्सरी के दो खिलाड़ी राज्य चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं, जबकि एक खिलाड़ी सब जूनियर राज्य चैंपियनशिप खेल चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नर्सरी में करीब 60 बच्चे नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। आसपास के गांवों के खिलाड़ी भी यहां पहुंचकर अभ्यास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।