फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुवि में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी के तहत यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की ओर से तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर और विकसित भारत विषय पर मंथन किया गया। शिक्षाविदों ने गीता के कालजयी विचारों के माध्यम से भारत के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करने पर विचार-विमर्श किया।
विज्ञापन


अध्यक्ष प्रो. नीलम रानी ने गीता को नैतिक नेतृत्व और संतुलित विकास का स्रोत बताया। प्रो. केके पांडेय ने कर्मयोग के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान पर बल दिया। डॉ. ऋषि राज शर्मा ने अनुशासन और धैर्य को व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति के स्तंभों के रूप में रेखांकित किया। प्रो. वागीश पालीवाल ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए गीता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्रो. कुसुमलता ने गीता के ज्ञान को शिक्षा और तकनीकी प्रगति के लिए उपयोगी बताया। वहीं इंस्टीट्यूट आफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज द्वारा शांत मन एवं सुखद पर्यावरण-श्रीमद्भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। प्राचार्य प्रो. रीटा ने गीता को भारतीय मनीषियों की सर्वाेच्च देन बताया। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक की दयानंद पीठ के रवि प्रकाश आर्य ने गीता को सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक ग्रंथ बताते हुए कहा इसके अध्ययन से वर्तमान समय की समस्त समस्याओं के निराकरण का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी के साथ अन्य वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें