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कैंसर से बचनेके लिए दृढ इच्छा शक्ति जरूरी : डॉ कनिका

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कुरुक्षेत्र ।कैंसर जैसे रोग से समय रहते बचा जा सकता है। इसके होने के बाद भी किसी को घबराने की जरूरत नहीं है अपितु इस बीमारी से लडने के लिए इच्छा शक्ति होनी जरूरी है। अहम पहलु यह है कि बायोप्सी (सुई प्रशिक्षण) कैंसर के प्रसार का कारण नही बनता है। ये जानकारी कैंसर विशेषज्ञ डाॅ.कनिका शर्मा ने पत्रकारों से यह बातचीत में दी
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उन्होंने कहा कि कैंसर की जागरूकता की कमी के कारण बहुत सारे मिथक नागरिकों में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि बायोप्सी कैंसर के बारे में जानने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रशिक्षण के लिए टयूमर से टिशु का एक टुकड़ा लिया जाता है। जिसे माइक्रोस्कॉप से देखा जाता है। बायोप्सी के परिणाम कैंसर के सही उपचार योजना में मददगार साबित होते हैं। यह टेस्ट कैंसर की पुष्टि का एक मात्र तरीका है। उन्होंने कहा कि आहार में चीनी अधिमानत अन्य कोशिकाओं पर ट्यूमर बनाती है। कैंसर जैसी कोशिकाओं के प्राथमिक ईधन के रूप में ग्लूकोज का उपयोग करे। ग्लूकोज सब्जियों, फलों, अनाज, डेयरी जैसे किसी भी भोजन से आता है। चीनी और कैंसर के जोखिम के बीच कोई संबंध नहीं है। इतना ही नहीं कैंसर कुछ परिवारों में अधिक बार हो सकता है। इस बीमारी के शुरुआती दौर में पता लगने पर कैंसर का इलाज किया जा सकता है। इस बीमारी के अग्रिम चरण में भी इलाज योग्य है। उन्होंंने कहा कि दूध, दहीं, पनीर, प्रोटीन, विटामिन, कैलश्यिम का अच्छा स्त्रोत है जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए दूध और दूध उत्पादों का प्रयोग पेट के कैंसर के मरीजों की संख्या को कम कर सकता है।
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