सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के अधीक्षक अभियंता अरविंद कौशिक का कहना है कि सरस्वती को दो फेज में धरा पर पूरी तरह से लाए जाने का प्लान बनाया गया है। पहले फेज में हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र में आदिबद्री बांध, सरस्वती बैराज व रिजर्व वाॅयर का कार्य पूरा किया जाएगा। दूसरे फेज में मुख्य तौर पर सभी 23 धाराएं ऐतिहासिक, पौराणिक व धार्मिक महत्ता के अनुसार विकसित की जाएंगी। इसके लिए पूरा खाका तैयार किया जा रहा है।
बोर्ड द्वारा की जा रही तैयारी के मुताबिक, सरस्वती की धाराओं को उनकी व आसपास के स्थल की मान्यता के अनुसार ही विकसित किया जाएगा। उस स्थल की ऐतिहासिक व पौराणिक महत्ता को केंद्रित करते हुए इस तरह से विकास किया जाएगा कि यहां श्रद्धालु और पर्यटक आकर्षित हो सकें और उन्हें वास्तविकता का आभास हो।
कुरुक्षेत्र : बोडला, खानपुर, नरकातारी, ज्योतिसर, भौर, सुरमी, संधौली, टिकरी, जुरासी कलां, प्राची तीर्थ, सतौड़ा, संतपुरा, बीड़ बरासन, स्योंसर।
यमुनानगर : रूलाहेड़ी, भोगपुर, जागधौली, खेड़ा कलां, फतेहपुर, साहिबपुरा।
कैथल : हरनौला, आंधली, लदाना चक्कू।