भावनाओं की कोई भाषा नहीं होती, लेकिन अगर उन्हें परिभाषित किया जाए तो शब्द भी कम पड़ जाते हैं। मनुष्य जहां शब्दों में अपनी भावनाओं को दूसरों के साथ साझा कर लेता है, लेकिन बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए यह सब मुमकिन नहीं है तो ऐसे में उनकी भावनाओं को समझना पड़ता है। इन्हीं भावनाओं को समझते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई कर रही सृष्टि ने स्ट्रीट डॉग्स की सेवा का बीड़ा उठाया हुआ है।
सृष्टि ने अपनी टीम के साथ करीब 50 स्ट्रीट डॉग को गोद लिया हुआ है। इतना ही नहीं इन डॉग के रहने, खाने-पीने और दवा के बंदोबस्त का खर्च टीम के युवा सदस्य खुद वहन करते हैं। सृष्टि ने बताया कि उन्होंने शाहाबाद और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में स्ट्रीट डॉग्स के लिए दो शैल्टर बनवाए हैं, जहां पर 50 से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स को रखा गया है। परिवार से ही प्रेरित होकर उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले इस कार्य को शुरू किया था। उस समय वह अकेले की जगह-जगह जाकर स्ट्रीट डॉग्स के लिए उनके खाने-पीने और रहने के बंदोबस्त अपनी जेब से ही करती थी। फिर धीरे-धीरे उनके साथ लोग जुड़ते चले गए और अब उनकी पूरी टीम मिलकर यह काम करती है। टीम का कोई भी सदस्य जब सड़क पर किसी भी डॉग को चोटिल देखता है तो उसे तुरंत शेल्टर लेकर पहुंचता है, जहां उसका पहले तो इलाज किया जाता है, फिर उसे वहीं पर रखकर उसकी देखभाल की जाती है। अब तीसरा शैल्टर बनाने की तैयारी चल रही है।
सृष्टि ने बताया उन्होंने सर्विंग ह्यूमनिटी के नाम से संस्था बनाई हुई, जिसे जल्द ही पंजीकृत कराया जाएगा। उनकी टीम में फिलहाल साहिल जो कि यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, वकालत की पढ़ाई कर रही गरिमा, केयू से ग्रेजुएशन कर रहे अमन व शीतल, अनन्या, बिजली निगम की कर्मचारी सरिता जुड़ी हुई हैं। वहीं सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक बीबी अरोड़ा और धर्मेंद्र हुड्डा डॉग्स के इलाज में सहयोग करते हैं, वहीं कुछ संस्थाएं व केयू प्रबंधन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सिम्मी की तरफ से उन्हें अन्य कई प्रकार के सहयोग मिलते रहते हैं। सृष्टि ने बताया कि वह जब जॉब करेंगी तो तीन चार साल की सेविंग के बाद स्ट्रीट डॉग्स के लिए डॉग बोर्डिंग बनाएंगी। जहां पर बहुत सारे डॉग्स को एक साथ रखेंगी और फिर जीवन भर वहां रह रहे डॉग्स की सेवा करेंगी।
डॉग्स के प्रति सृष्टि के प्रेम का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जब उसकी एमबीए अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही थी तो उसे पता चला कि टोहाना स्थित उसके घर पर डॉग की तबीयत खराब हो गई है तो उससे रहा नहीं गया और वह तुरंत अपने घर पहुंची, जबकि अगले दिन उसकी परीक्षा थी। सृष्टि ने बताया कि उसके डॉग का उसके साथ इतना लगाव है कि वह उसके बगैर खाना नहीं खाता। इस वजह से उसकी तबीयत बिगड़ी थी। उसने कुछ समय उसके साथ बिताया और खाना खिलाया, जिसके बाद परीक्षा देने वापस केयू आई।