पिहोवा। श्री कृष्ण कथामृत के चतुर्थ दिवस में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित कथा में साध्वी प्रवीणा भारती ने बाल लीला प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण ने जन कल्याण के लिए द्वापर युग में अवतार लिया। प्रभु जब कोई कार्य करते हैं तो वह लीला कहलाती है। प्रभु की ओर से की गई प्रत्येक लीला में आध्यात्मिक रहस्य छिपे होते हैं लेकिन समय के गर्त में वे धूमिल हो जाते हैं जिसके कारण मनुष्य सत्य के मार्ग से भटक जाता है। समय-समय पर संत महापुरुष इस धरा पर आकर उन रहस्यों को उजागर करते हैं।
प्रभु जब जब इस धरा पर आकर लीला करते हैं, साधारण मानव उन लीलाओं को समझ नहीं पाते। प्रभु को तत्व से जानने के बाद ही प्रभु की लीलाओं के वास्तविक मर्म को समझा जा सकता है। साध्वी ने कथा प्रसंग के माध्यम से बताया कि वैदिक काल के गुरुकुल मानव निर्माणस्थली होते थे।
किंतु आज की शिक्षा प्रणाली केवल एक पक्ष के लिए कार्य कर रही है, इसलिए तो मानव कल्याण की ओर नहीं अपितु विनाश की ओर उन्मुख हो रहा है। उसमें अहंकार की वृद्धि हो रही है। कारण केवल इतना ही है कि हम बच्चाें को बाह्य शिक्षा तो देते हैं लेकिन जिससे विकास की ओर हमारे कदम बढ़ सकते हैं उस आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव है।