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Kurukshetra News: गीता सम्मेलन में उदित हुई आध्यात्मिक, नैतिक और वैश्विक दृष्टि

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कुरुक्षेत्र। सम्मेलन में विचार रखते अंतरराष्ट्रीय गीता विशेषज्ञ। संवाद - फोटो : Samvad
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। दूसरे दिन मंगलवार को विभिन्न विभागों में प्लेनरी और तकनीकी सत्र हुए जिनमें देश-विदेश के विद्वानों ने गीता पर मंथन किया।
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इसके तहत यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी संस्थान में डिजिटल युद्धभूमि का शोर और गीता का सिग्नल विषय पर आयोजित प्लेनरी सत्र में विद्वानों ने गीता के शाश्वत संदेशों को आधुनिक डिजिटल युग, मानसिक चुनौतियों, सोशल मीडिया के प्रभाव और नैतिक नेतृत्व से जोड़ते हुए सारगर्भित विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता मलयेशिया से आए स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य की चेतना को जगाती है और मन के विकारों को शांत कर सही दिशा प्रदान करती है। इच्छाओं पर नियंत्रण और मानसिक शुद्धता के लिए गीता अध्ययन आज के समय में बहुत आवश्यक है।
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मलयेशिया के शिवानंद ने कहा कि गीता एक आध्यात्मिक सूचना तंत्र है जिसमें शिक्षक और शिष्य के बीच संवाद का अनूठा उदाहरण मिलता है। गीता में निहित मानव मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इस्कॉन बहरीन से पंकज मौर्य ने कहा कि गीता शिक्षण को आजादी और गुणवत्ता में परिवर्तित करती है।
जेएनयू के प्रो. सी उपेंद्र राव ने कहा कि वैश्विक परिवेश में सामाजिक समरसता और सद्भावना का संदेश गीता की देन है। निदेशक और डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि गीता में स्वदेशी की अवधारणा निहित है।
डिजिटल शोर मनुष्य को भीतर से करता है अस्थिर : इथोपिया के डैनियल ह्यूम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले लाइक्स, शेयर, कमेंट्स, रिग्रेट्स जैसे सोशल मीडिया संकेतों को मानसिक विकारों का कारण बताया। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल शोर मनुष्य को भीतर से अस्थिर करता है। इसलिए योग, ध्यान और आत्म-नियंत्रण अनिवार्य है। इन समस्याओं का समाधान गीता में समाहित है।
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