कुरुक्षेत्र। शक्तिपीठ में मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना करते पीठाध्यक्ष एवं मुख्य पुजारिन। स्वयं
कुरुक्षेत्र। झांसा रोड स्थित प्रदेश के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में भद्रकाली एकादशी के पावन अवसर पर विशेष पूजन एवं अभिषेक विधिविधान के साथ किया गया। सर्वप्रथम मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने मां का पावन जलाभिषेक एवं भव्य श्रृंगार किया। मां भगवती भद्रकाली को स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित करते हुए स्वर्णिम कड़ा अर्पित किया गया।
पीठाध्यक्ष ने मां की उत्सव प्रतिमा का भी विधिवत पंचामृत स्नान किया। शहद, दूध, दही, हल्दी, चंदन, कुमकुम एवं पीले चंदन से दिव्य स्नान कराया। संपूर्ण वातावरण वैदिक मंत्रोच्चारण एवं जयकारों से भक्तिमय हो उठा। मां को किशमिश, विभिन्न मिष्ठान, अनार, मीठे पान एवं पंचामृत का विशेष भोग अर्पित किया गया। भक्तों ने मां को पान के पत्ते, चुनरी, नारियल, पुष्प एवं पुष्पहार अर्पित किए। मां के श्रीचरणों में लाल गुलाबों की पुष्पवर्षा एवं सुगंधित इत्र अर्पित किया। पीठाध्यक्ष ने कहा कि हे मां भद्रकाली जीवन में सदैव सत्संग, श्रेष्ठ विचार एवं अच्छे लोगों का साथ प्राप्त हो, यही श्रीचरणों में प्रार्थना है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष डॉ एमके मौद्गिल, सेवा प्रमुख देवेंद्र गर्ग और आशीष दीक्षित सहित अन्य सेवक मौजूद रहे।
राक्षसों के संहार एवं धर्म रक्षा के लिए धारण किया अवतार : पीठाध्यक्ष
पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने मां भद्रकाली जी से सभी भक्तों की सुख एवं मंगल की कामना की। वे भद्रकाली एकादशी के महत्व पर बोले कि मां भद्रकाली ने राक्षसों के संहार एवं धर्म रक्षा के लिए अवतार धारण किया था। मां का रौद्र रूप अत्यंत प्रचंड हो गया, तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान शिव स्वयं मार्ग में लेट गए। उनको चरणों में देखकर मां का क्रोध शांत हुआ और अपने शस्त्र को दाहिने हाथ से बाएं हाथ में धारण कर लिया। दाहिने दोनों हाथ वर मुद्रा में आ गए। उसी क्षण मां ने शांत, कल्याणकारी एवं आशीर्वादमयी भद्रकाली स्वरूप धारण किया। इसी दिव्य स्वरूप एवं लोककल्याण की भावना के कारण भद्रकाली एकादशी का पर्व मनाया जाता है। मां भद्रकाली शक्तिपीठ में भी मां का शांत एवं कल्याणकारी स्वरूप विराजमान है।