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अंतरराष्ट्रीय साइकिल दिवस पर विशेष : ... जब 1947 में चंडी प्रसाद शर्मा ने 200 रुपये में दिल्ली से खरीदी थी आयात की गई साइकिल

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राजरानी
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कुरुक्षेत्र। 17 साल पहले धर्मनगरी में केक काटा गया तो मिठाई बांटकर खूब जश्न भी मनाया गया था। आसपास के ही नहीं रिश्तेदार भी बधाई देने पहुंचे थे तो लंबी उम्र की कामना भी की गई। माला पहनाकर सजाया गया था तो हर कोई एक झलक पाने को लालायित था। यह मौका किसी वीआईपी का नहीं बल्कि साइकिल के जन्म दिन का था। यह साइकिल अपने जमाने की बेहद खास ही नहीं चर्चित भी रही थी। यहां तक कि संयुक्त पंजाब की यह पहली साइकिल होने तक का दावा किया गया। वर्तमान में यह साइकिल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित हरियाणा धरोहर में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

आजादी मिलने के करीब ढाई महीने बाद 27 अक्तूबर 1947 शहर के हवेली सदावत निवासी चंडी प्रसाद शर्मा ने यह साइकिल दिल्ली से खरीदी थी। बताया जाता है कि इसे विक्रेता द्वारा आयात किया गया था। भले ही चंडी प्रसाद शर्मा इस दुनिया से चले गए, लेकिन बेटे बीके गौड़ ने इसे संजोकर रखा और जब वर्ष 2007 में साइकिल खरीदे जाने के 60 साल पूरे हुए तो उन्होंने बच्चे की तरह पूरे हर्षोल्लास से जन्म दिन मनाया।
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वीके गौड़ सेवानिवृत्त नेवी कमांडर और सेना भर्ती बोर्ड भोपाल के सदस्य समेत कई उच्च पद पर रह चुके हैं और अक्सर पिता द्वारा खरीद किए इस साइकिल की सवारी कर उन्हें बेहद सुखद एहसास होता था। वे बताते हैं कि पिता चंडी प्रसाद शर्मा यह साइकिल 27 अक्तूबर 1947 को कश्मीरी गेट से इएस प्यारे लाल की दुकान से 200 रुपये में खरीदी थी। उस समय प्यारे लाल दिल्ली के प्रमुख साइकिल आयातकर्ता थे। फिलिप्स कंपनी के साइकिल का नंबर ए-161415 है। गौड़ के मुताबिक उसके पिता बताते थे जब यह साइकिल लेकर आए तो कई महीनों तक उनके घर में इसे देखने वाले लोगाें का तांता लगा रहा। उसके पिता के उन्होंने भी इस साइकिल को संभाल रखा।
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स्थापना दिवस पर धरोहर को सौंपी साइकिल : चावला
धरोहर के क्यूरेटर डॉ. विवेक चावला का कहना है कि धरोहर के स्थापना दिवस पर गत वर्ष 28 अप्रैल को वीके गौड़ ने यह साइकिल भेंट की थी। धरोहर में यह साइकिल आज भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हर पर्यटक इसे देखने को लालायित दिखाई पड़ता है। साइकिल आज भी बेहतर स्थिति में है।
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