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दुनिया में शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए जरूरी है साउथ फेस्ट जैसे महोत्सव

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तक्षशिला, नालंदा का इतिहास फिर से लौट कर आएगा, भारत, नेपाल, भूटान बांग्लादेश, अफगानिस्तान की गौरवता को साउथ फेस्ट दोहराएगा। ये महोत्सव इस क्षेत्र के देशों में खुशहाली, समृृद्धि, आपसी प्यार, प्रेम व भाईचारे का प्रतीक है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश व भारत सभी देश धरती पर हिमालय का वरदान हैं। इसलिए इन देशों में कला, संस्कृृति, वेशभूषा और बोली भी एक जैसी है। ये शब्द राज्यसभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स ने युवाओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित 13वें दक्षिण एशियाई महोत्सव के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सोमवार को विभिन्न देशों व राज्यों की संस्कृृति व वेशभूषा के परिचय व विविधताओं से भरी सांस्कृृतिक शोभा यात्रा के साथ ही 13वें दक्षिण एशियाई महोत्सव का आगाज हुआ।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने झंडा दिखाकर सांस्कृृतिक शोभा यात्रा का उद्घाटन किया। उसके बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न मार्गों से होते हुए शोभा यात्रा ऑडिटोरियम हॉल में संपन्न हुई। इससे पूर्व राज्यसभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, सांसद नायब सिंह सैनी, कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ का किया। मुख्यातिथि राज्यसभा सांसद डीपी वत्स व सांसद नायब सैनी ने ऑडिटोरियम हॉल के बाहर फ्लावर फेस्टिवल, शिल्प ग्राम का उद्घाटन किया और इसके बाद विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में विधिवत रूप से साउ फेस्ट 2020 का रिबन काटकर उद्घाटन किया।
मुख्यातिथि ने कहा कि संस्कृृतियों की कोई सीमा नहीं होती। ऐसे उत्सव विभिन्न देशों व राज्यों के युवाओं को एक दूसरे को समझने का मौका देते हैं और यहीं से समाज की खुशहाली का रास्ता निकलता है। सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा प्रदेश के लिए यह गौरव का विषय है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को 13वें दक्षिण एशियाई सांस्कृृतिक महोत्सव की मेजबानी का मौका मिला है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर अपने देश व विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें।
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वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन फॉर यूथ एंड कल्चर के अध्यक्ष नीतिन शर्मा ने कहा कि युवाओं को विश्व को देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है। इसे बदलकर ही दुनिया में बदलाव लाया जा सकता है। विश्व शांत और विश्वकल्याण के लिए आपसी, प्यार प्रेम के लिए ऐसे सांस्कृतिक महोत्सवों का आयोजन बेहद ही जरूरी है। जब युवा जुडेंगे तो निश्चित रूप से देश व दुनिया जुडे़गी। विश्व बंधुत्व के संदेश के साथ जब हम पूरी दुनिया को परिवार मानेंगे तभी अपने लिए नहीं दुनिया के लिए कुछ अच्छा कर सकेंगे।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेेंद्र शर्मा ने कहा कि 13वें दक्षिण एशियाई युवा महोत्सव में 5 देशों, 28 विश्वविद्यालयों से 600 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। 24 से 28 फरवरी के बीच होने वाले इस महोत्सव में प्रतिभागी 9 विधाओं मेें अपनी प्रस्तुतियां देंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके विभाग व विश्वविद्यालय के लिए खुशी का अवसर है कि पहली बार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को इस महोत्सव की मेजबानी करने का मौका मिला हैै। उन्होंने कहा कि इस उत्सव के आयोजन से पूरे दक्षिण एशिया में कुरुक्षेत्र व देश का यश बढ़ेगा। इस मौके पर केयू सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. हरि प्रकाश ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के अंत में कुलपति डॉ. कैलाश चेद्र शर्मा ने श्रीफल व स्मृति चिह्न भेंट कर मेहमानों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी, कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, प्रो. पवन शर्मा, प्रो. रजनीश शर्मा, प्रो.श्याम कुमार, प्रो. आरके देसवाल, प्रो. बृजेश साहनी, डॉ. हितेंद्र त्यागी, भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, जिलापरिषद के चेयरमैन गुरदयाल सुनहड़ी, डीन, डायरेक्टर, शिक्षक व कलाकार मौजूद रहे।
दक्षिण एशिया में संपन्नता और खुशहाली का प्रतीक बनेगा केयू का साउथ फेस्ट : कुलपति
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि दक्षिण एशियाई युवा महोत्सव में दक्षिण एशियाई कला एवं संस्कृृति को हम एक मंच पर देखते हैं। विभिन्न देशों से आए कलाकार अपने देश की कला, संस्कृृति, वेशभूषा, जीवन दर्शन, किस्से व कहानियों को प्रस्तुत करते हैं। इससे हमें एक दूसरे को समझने का मौका मिलता है। पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शान्ति, समृद्धि, आपसी भाईचारे व कला एवं संस्कृृति के आदान-प्रदान का यह महोत्सव एक बड़ा प्रतीक है। कुलपति ने कहा कि इस कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मंच पर विभिन्न देशों की संस्कृृति, नृृत्य, वेशभूषा व संस्कृति से जुड़े अन्य अनजाने पहलू देखने को मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों की प्रस्तुति मंच के माध्यम से होगी।
भारत की सांस्कृृतिक विविधता के होंगे दर्शन
कुलपति ने कहा कि इस महोत्सव में विदेशी युवा कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 28 विश्वविद्यालयों से युवा भाग ले रहे हैं। भारत की सांस्कृृतिक विविधता के दर्शन भी इस मंच के माध्यम से होंगे। भारत की सबसे बड़ी खूबी इसकी विशालता व सांस्कृृतिक विविधिता है। किसी देश की युवा पीढ़ी जब उस विविधिता व दर्शन को मंच के माध्यम से प्रस्तुत करती है तो ऐसे क्षण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में न भुलाए जाने वाले पल होते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्यक्रमों की प्रस्तुति करें, ताकि यह महोत्सव साउथ फेस्ट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सके।
ऐसे रहेंगे कार्यक्रम
मंगलवार को विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में सुबह 10 से 12 बजे तक फाक आर्केस्ट्रा, सायं 2.30 से 5 बजे तक क्लासिकल डांस व सांय 5 बजे से 7 बजे तक विभिन्न देशों व राज्यों की फॉक कास्ट्यूम की प्रस्तुतियां होंगी। इसके साथ ही माईम, सीनेट हॉल में एलोक्यूशन, क्ले माडलिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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