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अनहोनी हुई तो बादल और मक्कड़ होंगे जिम्मेदार : झींडा

Thu, 24 Jul 2014 12:10 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
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एचएसजीपीसी की ओर से 28 जुलाई को करनाल में भारत भर के सिख बुद्धिजीवियों व धार्मिक संतों का पंथक सम्मेलन बुलाया जाएगा।
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सम्मेलन में प्रदेश के गुरुद्वारा साहिबान के लिए अलग से बनाई कमेटी पर अकाली नेताओं और एसजीपीसी द्वारा मचाए बवाल पर विचार किया जाएगा।

एचएसजीपीसी तदर्थ के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने डेरा बाबा चरण सिंह कार सेवा में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि बुधवार को सम्मेलन की तैयारियां के बारे में चर्चा की गई है।

झींडा ने कहा कि वे कोई हिंसा नहीं चाहते, लेकिन जिस प्रकार से गुरुद्वारा साहिबान में हथियारबंद टास्क फोर्स बिठाई है, उससे सिख संगत में भारी रोष है।

यदि कोई अनहोनी घटना होती है, तो उसके लिए प्रकाश सिंह बादल व अवतार सिंह मक्कड़ जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बादल को सलाह दी कि वे बड़े भाई होते हुए छोटे भाई को उसका हक दें और सिखों को गुमराह न करें।
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इस अवसर पर एसजीपीसी मेंबर हरपाल सिंह मछौंडा, संत गुरमीत सिंह तिरलोकेवाला, जोगा सिंह, करनैल सिंह, अवतार सिंह चक्कू, हरमनप्रीत सिंह सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

शुरू से ही झींडा के साथ मिलकर अलग कमेटी की मांग उठाने वाले दीदार सिंह नलवी इस अवसर पर नजर नहीं आए, इस बारे में अनेक चर्चाएं चल रही हैं।

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अलग कमेटी के असंवैधानिक ठहराने और गृह मंत्रालय को सलाह देने पर टिप्पणी करते हुए झींडा ने कहा कि हरियाणा के गुरुद्वारा साहिबान के लिए अलग से कमेटी का कानून बन चुका है।

इसे अब कोई भी नहीं तोड़ सकता। जहां तक हरियाणा सरकार को बर्खास्त करने की बात है, इस बारे में वित्तमंत्री चट्ठा ने भी कह दिया है कि कानून को वापस नहीं लिया जाएगा, चाहे सरकार की कुर्बानी क्यों न देनी पडे़।

झींडा ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल को खुश करने के लिए केंद्र सरकार इस कानून को गैर संवैधानिक बता रही है। जिसे अलग कमेटी के बनने पर एतराज है, वह इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।

उन्होंने कहा कि अब प्रकाश सिंह बादल के हरियाणा में वोट व नोट दोनों जा रहे हैं, इन्होंने लंबे समय तक गुरु गुल्लक को लूटा। पांच-सात दिन और लूट लें, उसके बाद अलग कमेटी गुरुद्वारा साहिबान का प्रबंध संभाल लेगी।
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उन्होंने यह भी कहा कि बडे़-बडे़ होर्डिंग व अखबारों में इश्तहार देकर एसजीपीसी सिख संगत को गुमराह कर रही है। झींडा ने कहा कि 1925 में जब एसजीपीसी का गठन हुआ था, तो उसके लिए बादल परिवार ने कोई कुर्बानी नहीं दी थी। उन्होंने दोहराया कि अब अलग कमेटी बन चुकी है और इसे दुनिया की कोई भी ताकत तोड़ नहीं सकती।
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