कुरुक्षेत्र। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से 13 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस बार लोक अदालत के दौरान जिला अदालत में छह बेंच व पिहोवा और शाहबाद में एक-एक बेंच के साथ विभिन्न मामलों की सुनवाई होगी। लोक अदालत में सुनवाई के लिए बुधवार तक पांच हजार 664 फरियादी अपने मामलों को निपटाने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
डीएलएसए में स्थायी लोक अदालत में भी 1 से 12 सितंबर तक हर रोज प्री लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है जिसमें हर रोज सैकडों मामलों की सुनवाई कर मामलों का त्वरित समाधान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, जिला अदालत में भी 12 सितंबर तक हर रोज छह से सात अदालतों में प्री लोक अदालत के तहत ट्रैफिक चालानों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है जिसमें नागरिक कम जुर्माने पर अपने चालानों का निपटारा कर रहे हैं।
डीएलएसए ने साइबर सेल, राजस्व विभाग और उपभोक्ता फोरम व अन्य विभागों को भी अपने मामलों को 13 को स्पेशल सुनवाई कर संबंधित मामलों का त्वरित निपटारा करने के लिए लोक अदालत का आयोजन करने का निर्देश दिया है। पुलिस और प्रशासन ने भी इस आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। साइबर सेल और राजस्व विभाग से संबंधित मामलों के लिए विशेषज्ञ बेंच की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जटिल मामलों का भी त्वरित समाधान हो।
डीएलएसए कार्यालय की ओर से कहा गया है कि यह लोक अदालत महिलाओं, श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। पारिवारिक विवादों और उपभोक्ता मामलों में आपसी सहमति से समाधान की संभावना अधिक रहती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों को निपटाएं।
पिछली लोक अदालत में 19,797 मामलों की सुनवाई कर 15,376 मामलों का निपटान : पिछली लोक अदालत में 19,791 मामलों की सुनवाई की गई थी। इनमें से 15,376 मामलों का मौके पर निपटारा हुआ और पांच करोड़ 85 लाख 93 हजार 296 रुपये के विवादों का समाधान हुआ था। इस बार यह आयोजन ठीक चार महीने बाद हो रहा है, जो न्याय प्रणाली की गति को दर्शाता है।
डीएलएसए की ओर से मुफ्त में दिया जा रहा है वकील : जिला वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र सामान्य वर्ग के उन लोगों के लिए मुफ्त कानूनी सलाह और वकील उपलब्ध करा रहा है जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है। अन्य वर्गों के लिए भी यह सुविधा मुफ्त है। डीएलएसए कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लोक अदालत के लिए कोई फीस नहीं लगती और समझौते से निपटारे पर कोर्ट फीस वापस की जाती है।