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देश के विकास में कौशल आधारित शिक्षा का अहम योगदान : ढांडा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। विश्व का कल्याण तभी होगा जब भारतीय सोच लेकर भावी शिक्षक तैयार किए जाएंगे। इसी सोच के तहत पूरी दुनिया के सामने हमने लक्ष्य रखा है कि 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाएंगे। विकसित भारत का रास्ता शिक्षकों को तय करना है, क्योंकि शिक्षा हर विषय का मूल है। जब शिक्षक अपना धर्म निभाते हुए अच्छे शिष्य तैयार करेंगे और वो शिष्य उच्च शिक्षा ग्रहण कर भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे तो निश्चित तौर पर विकसित भारत का सपना 2047 तक साकार होगा।
ये विचार शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन और हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के सहयोग में शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में, विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में कौशल आधारित शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत किसी भी कालखंड में कमजोर नहीं था। भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाकर विश्व गुरु बनाना हमारा संकल्प है। आज दुनिया में कब्जा करने की होड़ लगी हुई है। संवेदनाएं समाप्त हो गई है। हमारा संकल्प देश को शांति प्रदान करना है और चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना है।
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शिक्षकों ने अपने अनुभव किए साझा : माता सुंदरी कॉलेज दिल्ली की प्राचार्य प्रो. हरप्रीत कौर ने बताया कि आईटीईपी को चलाने में कोई दिक्कत नहीं है। छात्रों में इस कोर्स के लिए काफी उत्साह है। डॉ. शर्मिला ने एनईपी-2020 को लागू करने में आई चुनौतियों के बारे में बताया। डॉ. श्रुति ने बताया कि आईटीईपी कोर्स में प्रथम बार 59 छात्रों ने दाखिला लिया।
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सेकेंड ईयर में 98 छात्रों ने दाखिला लिया। मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स के कारण उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई और एनईपी-2020 के लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल जोशी ने बताया कि उनके विश्वविद्यालय में आईटीईपी कोर्स एसएफएस के तहत सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है, जिसमें करीब 187 छात्रों का दाखिला है।
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