सर, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी है, लेकिन यहां विद्यार्थियों को बहुत दिक्कतें हैं। यूनिवर्सिटी में सबसे बड़ी समस्या रिजल्ट लेट आने की है।
हॉस्टलों की कमी है, खासकर गर्ल्स हॉस्टल की। एक ही कमरे में चार-चार लड़कियों को रहना पड़ता है। ब्वॉयज हॉस्टल में शौचालयों और बाथरूम में सफाई नहीं है। कई विभागों में वॉटर कूलर और आरओ लगे हैं, लेकिन वे चलते नहीं है।
कुछ ऐसे ही सवालों के साथ विद्यार्थियों ने प्रदेश सरकार की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) के सामने दुखड़ा रोया। वहीं, कुटा और कुंटिया के पदाधिकारियों के साथ ही पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने भी मांग यूनिवर्सिटी पीएसी के सामने रखी। पीएसी सदस्यों ने सभी की मांगों को गंभीरता से सुना और जल्द दूर करने का आश्वासन दिया।
पीएसी ने ब्वॉयज व गर्ल्स हॉस्टल का दौरा कर हालात के बारे में जानकारी हासिल की। मौका था शुक्रवार को हरियाणा पब्लिक अकाउंट कमेटी की बैठक का। बैठक के संयोजक लाडवा से विधायक डॉ. पवन सैनी रहे, जबकि सदस्य के रूप में इनेलो विधायक रणबीर सिंह गंगवा मौजूद रहे।
उच्चतर शिक्षा निदेशक विकास गुप्ता के अलावा केयू के कार्यवाहक कुलपति हरदीप सिंह, रजिस्ट्रार डॉ. प्रवीण सैनी, विधायक सुभाष सुधा आदि उपस्थित रहे। कुलपति कार्यालय स्थित कमेटी रूम में हुई बैठक में यूनिवर्सिटी के लगभग सभी विभागों के विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था।
विद्यार्थ्यों ने बताया कि रिजल्ट लेट आने के कारण अगली कक्षाओं में दाखिला लेना मुश्किल हो जाता है। यूनिवर्सिटी में लड़कियों के लिए बस की सुविधा नहीं है। हेल्थ सेंटर में डॉक्टरों की कमी है। स्टाफ की कमी के कारण पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
कुटा पदाधिकारियों ने ये मांगें रखीं
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ (कुटा) ने पीएसी को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर कुटा प्रधान डॉ. परमेश कुमार, सचिव डॉ. नरेश, सहसचिव डॉ. कुलदीप सिंह, कुटा कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर डॉ. एमएस जागलान, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. दिनेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
- यूनिवर्सिटी का सालाना बजट लगभग 320 करोड़, लेकिन प्रदेश सरकार बजट के रूप में केवल 80 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी करती है। उन्होंने मांग की कि शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों के वेतन व पेंशन के लिए शत-प्रतिशत ग्रांट जारी की जाए।
- लगभग 425 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं तथा लगभग 350 शिक्षक कांट्रेक्ट पर हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित शिक्षक नियुक्त किए जाएं।
- बिना नेट पीएचडी डिग्रीधारक शिक्षकों को पांच अग्रिम वेतन वृद्धि देना।
- सेल्फ फाइनेंस स्कीम में कार्यरत शिक्षकों को बजटिड करना।
- शिक्षकों के खाली पदों को जल्द भरा जाए।
- पीएचडी धारकों की अग्रिम वेतन वृद्धियों को मूल वेतन में शामिल करना।
- एमडीयू रोहतक के पैटर्न पर शिक्षकों को पुरानी पेंशन स्कीम के लिए एक अवसर देना।
- यूनिवर्सिटी कॉलेज, यूनिवर्सिटी शैक्षणिक कॉलेज व दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय को यूनिवर्सिटी विभाग का दर्जा देना।
कुंटिया ने भी रखी मांग
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी नॉन टीचिंग इंप्लाइज यूनियन (कुंटिया) के प्रधान रामकुमार गुर्जर, प्रेस सचिव नरेंद्र सारसा, सहसचिव अंशुल शर्मा और कोषाध्यक्ष वकील चंद रंगा ने भी मांगें रखीं।
- यूनिवर्सिटी के वित्तीय क्राइसिस को दूर किया जाए।
- स्टाफ की कमी को दूर करना।
- प्रमोशन तो हो रही है, लेकिन पदोन्नति के बाद भी उस पद का वेतन नहीं मिल रहा है, इसकी वजह से 600 कर्मचारी प्रभावित हैं।
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी रखी मांगें
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों व पदाधिकारियों ने प्रधान मदन गोपाल शर्मा के नेतृत्व में मांगों की लिस्ट रखी। इस दौरान मुरारीलाल सैनी, रतन लाल गुप्ता, होशियार सिंह नरवाल, रामजुवारी शर्मा, जेके जैन शामिल रहे।
- पेंशन का पूरा पैसा हरियाणा सरकार दे।
- छठे वेतन आयोग का एरियर लगभग 17 करोड़ बनता है। उसे दिलाया जाए।
- 2014 में गैर शिक्षक कर्मचारियों का जो रेशो सिस्टम सरकार द्वारा पुरानी पद्धति पर स्वीकृत किया गया था, उसे लागू किया जाए।
केयू को और बेहतर बनाएंगे : संयोजक
कमेटी के संयोजक एवं लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी ने कहा कि पीएसी की बैठक में कुटा, कुंटिया, विद्यार्थियों और पेंशनर्स से उनकी मांगों के बारे में काफी चर्चा की गई है। इसके अलावा कई हॉस्टलों का दौरा भी किया गया है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्वॉइंट्स सामने आए हैं। यूनिवर्सिटी को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।