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जिस प्राचीन धर्मस्थल पर कब्जा कर दुकान खुली है,वहां आज पहुंचेगी केडीबी की टीम

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जिस प्राचीन मंदिर पर कब्जा कर उसमें दुकान खोल दी गई है, उस धर्मस्थल का निरीक्षण सोमवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की टीम करेगी। यह पुष्टि केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने की है। रविवार को उक्त धर्मस्थल का मामला अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से उठाये जाने के बाद सवाल खड़े हो रहे थे कि केडीबी के संस्थापक चेयरमैन एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा जी ने जिस प्राचीन धर्मस्थल के पुनरुद्धार की आधारशिला रखी थी, क्या वो शिव मंदिर कब्जे के बाद दुकान की सूरत में इसी बदहाली में रहेगी? रविवार शाम कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि खबर पर संज्ञान लेते हुए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर गगनदीप सिंह और संपदा प्रबंधक राजीव शर्मा सहित एक टीम मौके का जायजा लेगी, ताकि आगामी कार्रवाई की जा सके।
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इधर, नंदाजी के सहयोगी और तीन दशकों तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ऑफिस में सचिव रह चुके सुभाष गुप्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि जिस जगह नंदाजी के करकमलों से प्राचीन मंदिर के पुनरुद्धार की आधारशिला रखी गई थी, वह जगह राजस्व रिकार्ड में आज भी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मसरोवर के मध्य स्थिति तीन मंदिरों के अलावा पुराने घाटों पर स्थित मंदिरों का अधिग्रहण केडीबी ने नहीं किया था, लेकिन उक्त मंदिर में सबसे अलग बात ये है कि इन मंदिर केे जीर्णोद्धार का नींव पत्थर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और केडीबी के तत्कालीन चेयरमैन नंदाजी द्वारा रखा गया था। लिहाजा अब यह जिम्मेदारी बनती है कि उन्होंने जिस काम को 31 साल पहले शुरू कराया था, उसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि नंदाजी द्वारा किये गये कार्य अधर में न लटके।
बता दें कि सुभाष गुप्ता 1982 से 2011 तक केडीबी ऑफिस के सचिव पद पर रहे। सवाल यह भी उठता है कि नंदाजी द्वारा उक्त प्राचीन मंदिर के पुनरुद्धार की आधारशिला रखे जाने के बाद गुप्ता भी 22 साल तक केडीबी के ऑफिस सचिव रहे, तो उनके कार्यकाल में इस मंदिर को लेकर उचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई ? मंदिर का शिखर, चारदीवारी और अन्य व्यवस्था क्यों नहीं की गई? या किसी संगठन को सौंप कर क्यों नहीं कराई गई ? इस सवाल के उत्तर में गुप्ता ने बताया कि केडीबी के पास पहले इतना बजट नहीं था, जितना की पिछले वर्षों में केडीबी के पास पहुंच रहा है। यदि इतना बजट होता तो शायद बहुत पहले इस मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य भी पूरा होता।
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पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. मंगलसेन पहुंचे थे माथा टेकने
1989 में भारतीय जनता युवा मोरचा के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण बजाज ने बताया अस्सी के दशक के अंत में हरियाणा के उप मुख्यमंत्री डॉ. मंगलसेन थे और स्थानीय निकाय मंत्रालय उनके पास था। इसी के अधीन उस दौर में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड था। तत्कालीन एक अधिकारी के आदेश पर उक्त मंदिर को गिराने की कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद नगर के कुछ संगठन और स्थानीय ब्राह्मण सभा के प्रतिनिधियों ने इसका पुरजोर विरोध कर अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि शहर में उक्त धर्मस्थल की वजह से काफी तनावपूर्ण माहौल हो गया था, जिसके बाद वह स्वयं रोहतक से डिप्टी सीएम डॉ. मंगलसेन को लेकर उक्त धर्मस्थल पर पहुंचे थे। तब डॉ. मंगलसेन ने यहां माथा टेका था और मंदिर के जीर्णोद्धार का आश्वासन यहां की ब्राह्मण सभा को दिया था। इसी के बाद केडीबी के तत्कालीन चेयरमैन एवं पूर्व प्रधानमंत्री नंदाजी ने मंदिर के पुनरुद्धार की आधारशिला रखी थी।
डॉ. मंगलसेन ने किया था केडीबी अधिकारियों के तलब
हरियाणा में भाजपा के कद्दावर नेता रहे डॉ. मंगलसेन के उपमुख्यमंत्री रहते हुए इस मंदिर को लेकर जो विवाद पनपा था, उस पर उन्होंने कड़ा संज्ञान लिया था। यह पुष्टि स्वयं केडीबी के तत्कालीन कार्यालय सचिव सुभाष गुप्ता ने की है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉ. मंगलसेन ने बतौर कार्यालय सचिव उनके अलावा केडीबी के तत्कालीन संपदा प्रबंधक बलकार सिंह, मेंबर सेक्रेटरी कोमल आनंद को तलब किया था। यहां तक उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात तक कह डाली थी, लेकिन मेंबर सेक्रेटरी के नरम रूख के बाद उनका गुस्सा ठंडा हुआ और मंदिर के जीर्णोद्धार कराने की कार्रवाई कुछ समय बाद आगे बढ़ी।
नंदाजी ने स्थानीय संगठनों के साथ की थी बैठक : गुप्ता
बताया गया है कि केडीबी के चंडीगढ़ से निकले एक आदेश के बाद उक्त धर्मस्थल का पुराना निर्माण ढहा दिया गया था। उस समय तत्कालीन एसडीएम एवं नगर पालिका थानेसर के प्रशासक लाल सिंह थे। गुप्ता के मुताबिक इस कार्रवाई से स्थानीय संगठनों ने गुस्सा जाहिर किया था। बाद में तत्कालीन ब्राह्मण सभा और स्थानीय कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नंदाजी ने थानेसर अग्रवाल धर्मशाला में बैठक के बाद इस प्राचीन धर्मस्थल के जीर्णोद्धार की आधारशिला 28 जुलाई 1989 को रखी थी।
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