कुरुक्षेत्र। गांव मथाना निजी पैलेस चार दिवसीय शिव कथा का आयोजन किया गया, जिसके प्रथम दिवस में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु आशुतोष की शिष्या साध्वी ब्रह्मनिष्ठा भारती ने कथावाचन किया। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण एक विलक्षण व दिव्यता से परिपूर्ण ग्रंथ है।
उन्होने कहा कि शिव महापुराण की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है। क्योंकि भगवान भूतों के अधीश्वर साक्षात परमात्मा हैं, जो समस्त जीवों को आत्म ज्ञान देकर ईश्वर से जुड़ने की कला सिखाते हैं।
साध्वी ने बताया कि भगवान भोलेनाथ की कथा में गोता लगाने से मानव की प्रभु की प्राप्ति होती है। कथा सुनने व उसमें उतरने में अंतर होता है। सुनना तो सहज है लेकिन इसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकता है। चंचुला नाम की स्त्री को जब संत का संग मिला वह शिव धाम की अनुगामिनी बनी। एक घड़ी के सत्संग की तुलना स्वर्ग की समस्त संपदा से की गई है। संत की कृपा से लंकिनी के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ। संत के चरणों का प्रताप ही ऐसा है कि अहिल्या, शबरी जैसे भक्त इसे प्राप्त कर सहज ही भवसागर से पार हो गये। संत के संग से ही मरूस्थल जीवन में बहार आ जाती है। नीरस जीवन सरस बन जाता है। विकारों से परिपूर्ण ह्रदय ईश्वरीय भक्ति से भर जाता है।