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निस्वार्थ सेवा तथा परमात्मा की भक्ति ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य : स्वामी अर्शमुनि

Mon, 21 Jul 2025 06:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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लाडवा। अक्षरधाम मंदिर कुरुक्षेत्र के प्रमुख संतों की ओर से मासिक संकीर्तन व प्रवचनों का आयोजन किया गया। अक्षरधाम मंदिर कुरुक्षेत्र के प्रमुख संत स्वामी ज्ञान मंगल, स्वामी आनंद प्रकाश,स्वामी अर्शमुनि, स्वामी शोभित मुनि मासिक संकीर्तन व प्रवचन के लिए समाजसेवी जोगध्यान के घर पहुंचे।
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सत्संग के प्रारंभ में स्वामी ज्ञान मंगल ने हरि नाम संकीर्तन से सत्संग का प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य प्रत्येक मानव को कल्याण और मोक्ष की ओर ले जाना है। हमारे मासिक सत्संग का भी यही उद्देश्य होता है कि ज्यादा से ज्यादा व्यक्ति सत्संग का लाभ ले सकें तथा प्रभु भक्ति की ओर अपने जीवन को ले जा सके। स्वामी अर्शमुनि ने सत्संग वर्षा करते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास जी को 18 पुराणों की रचना के पश्चात भी आत्मिक शांति का अनुभव नहीं हुआ। श्रीमद् भागवत महापुराण के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ऋषभदेव जी के सौ पुत्र थे और वह अपने पुत्रों के साथ नियमित रूप से ज्ञान चर्चा तथा सत्संग किया करते थे। ऋषभदेव ने अपने पुत्रों को भी निस्वार्थ सेवा तथा प्रभु भक्ति का उपदेश दिया था जो मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। इस मौके पर राजेंद्र कुमार, डॉ अमित बंगा, मास्टर मुकेश शर्मा, एडवोकेट सुखबीर बपदी, कोच चमन लाल, जितेंद्र कुमार, मास्टर किरण कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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