बैंकों के निजीकरण के विरोध में लगातार दूसरे दिन सरकारी बैंकों का कामकाज पूरी तरह बंद रहा। जिले में सरकारी बैंकों की 172 शाखाएं और 178 एटीएम नकदी खत्म होने के चलते बंद रहे, जिससे उपभोक्ताओं को तो परेशानी उठानी ही पड़ी, वहीं दो दिन हड़ताल रहने से जिले में 600 करोड़ का लेनदेन प्रभावित भी हुआ है। मंगलवार को बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने सेक्टर में जोरदार प्रदर्शन किया गया तदोपरांत रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन डीआरओ चांदी राम को सौंपा। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संयोजक राय सिंह ने बताया कि वित मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने की बात कही गयी है, वह न तो जनता के हित में है और न ही कर्मचारियों के। यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किया जाता है तो भारत सरकार द्वारा चलाई गई जनहित योजनाओं का लाभ जन जन तक नहीं पहुंच पाएगा और निजीकरण से कुछ पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के हाथ में देश की अर्थव्यवस्था चली जाएगी। कॉमरेड विनय कुमार, प्रीतम सिंह व जसपाल सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के निजीकरण से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी, जो कि आने वाली युवा पीढ़ी के लिए निराशाजनक है। इससे जनता की बचत पूंजी पर बड़े पूंजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। पंकज और विजेंद्र ने बताया कि हमें हड़ताल पर जाने का कोई चाव नहीं है। हड़ताल करने पर हमारा वेतन कटता है तथा हड़ताल के दिनों का लंबित कामकाज का बोझ बैंकों के खुलने पर हमने ही निपटाना होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमारी मांग पूरी नहीं की तो बैंकर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार है। हाकम चौधरी व गुरदीप सिंह ने बताया कि बैंकों का एनपीए बढ़ने की सबसे बड़ी वजह सरकार की गलत नीतियां है। उद्योगपतियों को कई प्रकार से छूट दी जाती है, जिसकी वजह से बैंकों को कर्ज वसूलने में दिक्कत होती है। इस अवसर पर विनोद अरोड़ा, संदीप तेजा, सतीश रोहिल्ला, विशाल सिंगला, विकास, चंद्र दुआ, सुनील कुंडू, विनोद कुमार, अनीता वालिया, सिमरित कौर, रितु कंबोज, रश्मि बठला, शेरील वालिया, अखिलेश झा, लेख राज, राजेंद्र कौशिक, अशोक कश्यप व जिले सिंह आदि उपस्थित रहे।
चंडीगढ़ सर्कल के उप प्रधान राजकुमार नीलवान ने अपने दौरे के दौरान लाडवा की अनाज मंडी में पत्रकारों से बताया कि सरकार जो कि सरकारी संस्थाओं का निजीकरण कर रही है, उसे तुरंत बंद किया जाए। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार को बैंकों में कर्मचारियों की कमी को देखते हुए तुरंत जनहित में कर्मचारियों की भर्ती करे।