कुरुक्षेत्र। किसान मेला में किसानों को सम्मानित करते पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा। विज्ञप्ति
- फोटो : मेडिकल कॉलेज में दवा लेने के लिए कतार में लगे मरीज व तीमारदार।
कुरुक्षेत्र। कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में जिला स्तर पर एक अहम पहल के तहत सोमवार को फसल विविधीकरण पर एक दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में जिले के करीब 800 किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल की। विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों से एक ही फसल चक्र से बाहर निकलकर वैकल्पिक फसलों को अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को सीधा लाभ देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। किसानों के हर एकड़ का पंजीकरण किया जा रहा है ताकि सरकारी सहायता सीधे किसानों के खाते में पहुंच सके। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार पिछले कई वर्षों से प्रोत्साहन राशि दे रही है। इस वर्ष जिले को इस योजना के तहत 264 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। पूर्व मंत्री ने गिरते जलस्तर पर चिंता व्यक्त की और कहा कि लगातार धान जैसी एक ही फसल बोने से उत्पादन क्षमता घटती है और किसान की आय भी प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से धान के स्थान पर अन्य फसलों को अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. हरिओम ने प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया और कहा कि इससे लागत कम और मुनाफा अधिक होता है। वहीं गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार ने वैज्ञानिक खेती, उन्नत किस्मों और रोग नियंत्रण पर किसानों को जागरूक किया। उप मंडल कृषि अधिकारी डॉ. जितेंद्र मेहता ने बताया कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही ड्रोन दीदी योजना की जानकारी दी। इसके तहत झांसा और नलवी गांव में स्प्रे के लिए प्रति एकड़ सहायता दी जाएगी। मेले के दौरान प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले 10 किसानों को पुरस्कार प्रदान किए गए और उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
38 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर
उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने किसानों से एग्री स्टैक स्कीम के तहत अपने खेतों की आईडी बनवाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि समय पर मिलेगी और खाद वितरण भी सुचारू रूप से हो सकेगा। मेरी फसल मेरा ब्योरा को भी इसी योजना से जोड़ा गया है। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन की सराहना करते हुए बताया कि किसानों की ओर से खेतों में आग न लगाने से न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ी है, बल्कि हवा भी साफ रही है। इस पहल के लिए प्रदेश सरकार ने 1200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से करीब 38 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर की है, जो जल्द किसानों के खातों में डाली जाएगी।