जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में शिकायतकर्ता के हक में सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया है। आयोग ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत बकाया गृह ऋण राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 11 हजार रुपये शिकायतकर्ता को हर्जाने के रूप में 45 दिन के भीतर देने के आदेश दिए हैं। आदेशों की अवहेलना करने पर 25 हजार रुपये व एक साल तक की सजा के जुर्माने की सजा काटनी होगी।
जानकारी के अनुसार चनारथल रोड की रहने वाली शिकायतकर्ता मीना कुमारी ने अपने पति जय भगवान के साथ वर्ष 2019 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) लाडवा रोड पिपली शाखा से 18 लाख रुपये का गृह ऋण लिया था, जिसका एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की ऋण रक्षा पॉलिसी के तहत बीमा किया गया था। शिकायत के अनुसार नियमित किश्तों का भुगतान करते हुए उनके पति जय भगवान की 26 जून 2021 को मृत्यु के हो गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बकाया ऋण की राशि चुकाने के लिए बीमा कंपनी से दावा किया, जिसे एसबीआई बीमा कंपनी ने तकनीकी आधारों पर खरा न उतरने का दावा कर खारिज कर दिया।
आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे और बीमा कंपनी ने शुरू में दावे का भुगतान करने का आश्वासन दिया था। दूसरी ओर एसबीआई लाइफ ने दावा किया कि जय भगवान की मृत्यु अत्यधिक शराब के सेवन से हुई और यह बीमारी पॉलिसी लेते समय छुपाई गई थी। हालांकि आयोग ने पाया कि मृतक की आयु ऋण लेते समय मात्र 38 वर्ष थी और कोई साक्ष्य नहीं था कि वह पहले से किसी बीमारी से पीड़ित थे।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला, सदस्य नीलम और रमेश कुमार ने दोनों पक्षों के साक्ष्य और तर्कों की गहन जांच के बाद फैसला सुनाया। आयोग ने एसबीआई लाइफ को 45 दिनों के भीतर भारतीय स्टेट बैंक को बकाया ऋण राशि का भुगतान करने और शिकायतकर्ता को 11,000 रुपये की लागत अदा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, बैंक को ऋण राशि प्राप्त होने पर शिकायतकर्ता को विक्रय विलेख जारी करने का आदेश दिया गया।