कुरुक्षेत्र। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भारत के संत समाज में गहरा रोष है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर आयोजित अखिल भारतीय संत सम्मेलन में भी यह मुद्दा खूब उछला तो संत समाज भी हिंदुओं के समर्थन में उतर आया।
संतों ने उन्हें प्रताड़ित करने पर प्रतिबंध लगाने बल्कि हर संभव मदद करने को लेकर प्रस्ताव रखा तो इस पर एकजुटता के साथ मुहर भी लगाई। स्वामी परमानंद ने कहा कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों और उनकी आस्था पर हो रहे हमलों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संबंधित संगठनों का निष्क्रिय रहना निंदनीय है।
मध्यप्रदेश के राज्यसभा सदस्य उमेश नाथ ने इस विषय पर युवाओं को जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म और परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए जात-पात, संप्रदाय, दल, और पार्टी के भेदभाव से ऊपर उठकर काम करना होगा। यदि समय रहते हम जागरूक नहीं हुए, तो सनातन धर्म और उसकी परंपराओं को बड़ा नुकसान हो सकता है।
उन्होंने गीता ज्ञान को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राष्ट्र और समाज का कल्याण करना भी है। हमें धर्म और परंपराओं की रक्षा के लिए निडर होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मुद्दे पर संत समाज का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं की सुरक्षा में विफल साबित हो रही है, उन्हें न केवल हिंदुओं बल्कि उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए। इस दौरान संत समाज ने बांग्लादेश में हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने बांग्लादेश के हिंदुओं के मुद्दे पर रखे प्रस्ताव पर सभी संतों की सहमति व ओम का उदघोष करवा मुहर लगवाई। उन्होंने बांग्लादेश के प्रताड़ित हिंदुओं का हर तरह से समर्थन करने के अलावा उन्हें जरूरत पड़ने पर यहां शरण दिए जाने की भी पूरजोर अपील की। मंच से सभी संतों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि सनातन धर्म पर किसी भी प्रकार का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने हिंदू समाज को जागरूक और एकजुट होने का आह्वान किया और धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए सभी को एक साथ खड़े होने की प्रेरणा दी।