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सन्निहित सरोवर की दुर्दशा धर्मनगरी को कर रही शर्मसार

Wed, 08 Mar 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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sannihit sarovar - फोटो : अमर उजाला
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यह शिलालेख बताता है 1921 में ब्रिटिश गवर्नर सर एडवर्ड मैकलेग ने सन्निहित तीर्थ का महत्व समझ कर ही यह फरमान जारी किया था कि सरकारी अधिकारी जो भी इस स्थान पर पधारे वह इस स्थान की पवित्रता का भली प्रकार से ख्याल रखे और इसके आसपास के ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर इत्यादि की रक्षा करने में सहायता दे, मगर यहां के मौजूदा शर्मसार करते दिखाई दे हैं। इसके पहले 1851 में तत्कालीन गवर्नर जनरल ने यहीं आदेश जारी किए थे। बात धर्मनगरी के उस प्रमुख तीर्थ स्थल सन्निहित सरोवर की हो रही है, जिसके पवित्र घाट पर खड़ा ब्रिटिश शिलालेख मौजूदा व्यवस्था को धिक्कार रहा है।
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दुखद पहलू यह है कि यहां आस्था के साथ-साथ इतिहास के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है, क्योंकि यह शिलालेख 1851 में इंडिया के तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल के अलावा 1921 में पंजाब गवर्नर सर एडवर्ड मैकलेग के यहां आगमन का साक्षी हैं। प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की लापरवाही के कारण इस समय इस शिलालेख का एक हिस्सा भी पूरी तरह खराब हो चुका है।

 सन्निहित सरोवर की दुुर्दशा पर जब अमर उजाला ने रियल्टी चेक किया तो यहां की बदहाली सामने आई। कैमरे में कैद हुई पवित्र सन्निहित सरोवर में उफनती हुई काई, जल में गंदगी के अंबार, ग्रीन बेल्ट को चलते हुए पशुओं का जमावड़ा, सरोवर में सुरक्षा के लिए लगाई गई ग्रिलें, जो कई जगहों से टूट चुकी हैं। वो धंसीं हुई संगमरमर की सीढ़ियां जहां आए दिन श्रद्धालु चोटिल होते हैं। इन हालात पर जब श्रद्धालु, तीर्थोद्धार सभा के पदाधिकारियों और आम नागरिकों से बात की तो वे भी दांत पीसते नजर आए।
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 इन्होंने बताया कि जिस तीर्थ की चिंता 1851 में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जरनल इंडिया ने और 1921 में पंजाब के ब्रिटिश गर्वनर सर एडवर्ड मैकलेग ने की थी, वहां के हालात 161 साल बाद भी दयनीय होना, दुर्भाग्यपूर्ण है। श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के अध्यक्ष यशेंद्र शर्मा ने कहा कि पिछले कई वर्षों से राजनेता और अधिकारी कुरुक्षेत्र को विश्व मानचित्र पर लाने के जो दावे कर रहे हैं, वो ऐसे हालात में सिर्फ छलावा नजर आते हैं।

करोड़ों का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निष्क्रिय
कांग्रेस के शासनकाल में सन्निहित सरोवर के जल को शुद्ध रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, मगर यह निष्क्रिय हालात में है और सरोवर का जल सड़ रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट के साथ इस सरोवर की सीढिय़ों पर संगमरमर और ग्रेनाइट पत्थर लगे थे, जो महज तीन वर्षों में उखड़ने लगे हैं। इसी का नतीजा है कि कई जगहों पर सीढ़ियां धंस कर नीचे बैठ चुकी है। इसकी वजह से बुजुर्ग श्रद्धालु चोटिल होते हैं।

सबसे बड़ा खतरा टूटी हुई सीमेंट की ग्रिलें
अशोक बाली ने बताया कि सन्निहित सरोवर करीब 15 फुट से भी ज्यादा गहरा है। श्रद्धालु स्नान करते हुए डेंजर जोन में ना जाए, इसके लिए रेलिंग लगाने के साथ चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर रेलिंग टूटी हुई है,जिसके कारण सरोवर में डूबने और जान जोखिम का खतरा बना हुआ है।

 ग्रीन बेल्ट को चर रही हैं गाय-भैंसे
सरोवर तट की सुंदरता के लिए यहां ग्रीन बेल्ट बनाई हुई है। मगर लावारिस पशुओं में गाय,भैंसे और अन्य जानवर इस सुंदर को चरते और लड़ते हुए रोजाना यहां दिखाई देंगे। यहां आसपास के दुकानदारों का कहना है कि कई बार लड़ते हुए यह पशु यात्रियों को भी शिकार बना चुके हैं। इनके मुताबिक सिर्फ विकास कार्य करके व्यवस्था को भगवान भरोसे छोड़ना गलत है।  

दुर्गंध कुंड में बदला सन्निहित का कमल कुंड
सन्निहित सरोवर के कमल कुंड की दीवारें टूट चुकी है। कमल कुंड की सुंदरता के लिए ना इसमें कमल दिखे हैं और ना ही कमल पत्तलें। देखने को अगर इस कमल कुंड में कुछ है तो सिर्फ दलदल है। इतना ही नहीं इसमें कई मरे हुए जानवर भी पड़े हैं। लोगों का कहना है कि दलदल और मरे हुए जानवरों की वजह से यह कमल कुंड अब दुर्गंध कुंड बनकर रह गया है।

केडीबी के सीईओ का आश्वासन, बुधवार को जायजा लेंगे  
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर गौरव अंतिल को जब इन हालात से अवगत कराया गया तो उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त की और आश्वासन दिया कि वह बुधवार को सन्निहित सरोवर और एतिहासिक शिलालेख का मुआयना करेंगे और जल्द ही व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। तीर्थों के चिंताजनक हालात केडीबी दफ्तर से चंद कदम की दूरी पर स्थित सन्निहित सरोवर के यह हालात हैं तो महाभारत कालीन 48 कोस भूमि में स्थित उन तीर्थों का क्या हाल होगा, जिनके जीर्णोद्धार और संरक्षण का जिम्मा केडीबी के कंधों पर है।

ना दफ्तर में मिले ना फोन किया अटेंड
भाजपा नेताओं का कहना है कि केडीबी के इतिहास में पहली बार मानद सचिव इसलिए नियुक्त करने की जरूरत पड़ी, क्योंकि इससे तीर्थों के विकास और उससे जुड़ी समस्या का तेजी से निपटारा होगा, मगर उक्त मामले को लेकर जब केडीबी कार्यालय में मानद सचिव से संपर्क करना चाहा तो वे ना तो दफ्तर में उपलब्ध हुए और ना ही उन्होंने फोन अटेंड किया।

केडीबी सदस्य नरुला बोले उठाएंगे यह मामला
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य विजय नरुला का कहना है कि सन्निहित सरोवर कुरुक्षेत्र का प्रमुख तीर्थ है। वह इस मामले को केडीबी के अधिकारियों से अवगत कराएंगे। केडीबी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब 7 की जगह 10 गैर सरकारी केडीबी सदस्यों के अलावा एक मानद सचिव को भी नियुक्त किया है, लेकिन इसके बावजूद मानिटरिंग क्यों नहीं हो रही? इसका जवाब किसी सदस्य को देते नहीं बना। कुछ सदस्यों ने इस पर प्रतिक्रिया देने की बजाय चुप्पी साध ली।
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