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Kurukshetra News: सकट चौथ व्रत आज, संतान की दीर्घायु और संकट मुक्ति का पर्व

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कुरुक्षेत्र। हिंदू धर्म में सकट चौथ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इसे तिल चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और माघी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से माताओं की ओर से संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में यह व्रत मां और संतान के अटूट प्रेम का प्रतीक माना गया है। इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से संतान के जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। ज्योतिष पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 6 जनवरी को सुबह आठ बजकर दो मिनट से होगा और इसका समापन 7 जनवरी को सुबह छह बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 6 जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन रात आठ बजकर 58 मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा जिसके बाद व्रत खोला जाएगा।
भगवान गणेश के समक्ष निर्जला व्रत का लेती हैं संकल्प
ज्याेतिषाचार्य बलराज कौशिक ने बताया कि सकट चौथ के दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर लाल वस्त्र धारण करती हैं और भगवान गणेश के समक्ष निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। पूजा में गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, अक्षत, फूल और सुपारी अर्पित की जाती है और तिलकुट का भोग लगाया जाता है। रात्रि में चंद्र दर्शन कर दूध, जल और अक्षत से अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण किया जाता है। इस दिन गणपति की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
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