केयू में गैर शिक्षक कर्मचारियों की हड़ताल में अब नए नए मोड़ आने लगे हैं। एक तरफ हड़ताल से परेशान केयू प्रशासन के आरटीआई और सीएम विंडों पर की गई शिकायतों की पेंडिंग फाइलें निपटाने में पसीने छूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ हड़ताल खत्म कराने के सारे प्रयास भी विफल हो रहे हैं। सोमवार को केयू प्रशासन ने दावा किया कि कुंटिया प्रतिनिधियों से वार्ता की गई, लेकिन उन्होंने नई मांग रख दी जिसके चलते वार्ता विफल हो गई। जबकि कुंटिया प्रधान ने किसी तरह की वार्ता होने से ही इनकार कर दिया है।
केयू प्रशासन और कुंटिया की इस खींचतान में शैक्षणिक कार्यों के साथ ही विभागीय कार्य भी अटक रहे हैं। हालांकि केयू प्रशासन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से आरटीआई और सीएम विंडों से संबंधित पेंडिंग फाइलें निपटवाने में लगा हुआ है। कुंटिया ने आरोप लगाया है कि केयू प्रशासन कर्मचारियों से विश्वासघात कर रहा है और अन्य लोगों को भी गुमराह कर रहा है। प्रधान ने हड़ताल जारी रखने की बात कही है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में दो अगस्त से शुरू हुई गैर शिक्षक कर्मचारियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। इधर हड़ताल से बेहाल हुई व्यवस्था को काबू करने के लिए केयू प्रशासन हर तरह से प्रयास भी कर रहा है। लेकिन अब तक कुंटिया के प्रतिनिधियों को काम पर लौटने के लिए मना नहीं पाया है। यूनिवर्सिटी हड़ताल से प्रभावित हुए कामों से परेशान हो रहा है, वहीं आरटीआई और सीएम विंडों से संबंधित फाइलें तय समय में पूरा करने का दबाव भी यूनिवर्सिटी प्रशासन की परेशानी बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
केयू प्रशासन ने पेंडिंग फाइलों के लिए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम कराने का निर्णय लिया था ताकि विद्यार्थियों को परेशानी न हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यूनिवर्सिटी में हड़ताल के बाद से कोई काम विद्यार्थियों से संबंधित हुआ ही नहीं। जिन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, वह आरटीआई और सीएम विंडों की पेंडिंग फाइलें निपटा रहे हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी के दूसरे काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं।
हमने सकारात्मक रुख दिखाया है : रजिस्ट्रार
हड़ताल खत्म कराने की कोशिशों के बीच सोमवार को अजीब सी स्थिति सामने आई। केयू प्रशासन ने दावा किया है कि वह कर्मचारियों के हित के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। सोमवार को भी कुंटिया वार्ता विफल हो गई। इसका कारण कुंटिया की नई मांग को बताया जा रहा है। केयू के रजिस्ट्रार डॉ. प्रवीण सैनी ने बताया कि सोमवार को कुंटिया के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई थी। केयू प्रशासन के सकारात्मक रुख व तमाम प्रयासों के बाद भी कुंटिया पदाधिकारी सहमत नहीं हुए।
कुलपति की और से नियुक्त कमेटी के सदस्यों ने कुंटिया पदाधिकारियों से बातचीत की थी लेकिन इस दौरान उन्होंने नई मांग रख दी। जिससे मामला फिर अटक गया और बातचीत नतीजे पर नहीं पहुंची। रजिस्ट्रार ने बताया कि प्रशासन ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलकर कर्मचारियों का पक्ष रखा है। उनका कहना था कि गैर शिक्षक कर्मचारियों की एसएफएस की कंफर्मेशन 5 वर्ष से 2 वर्ष करने के लिए डीन एकेडमिक अफेयर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने एसएफएस नियमों में बदलाव की सिफारिश कर दी है।
एक्स कैडर कंप्यूटर बजटेड पोस्ट में प्रमोशन के लिए डीन फैकल्टी ऑफ साइंस प्रोफेसर श्याम कुमार की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है। इस पर भी निर्णय लिया जा चुका है और स्थापना शाखा ने इस संबंध में ड्राफ्ट कमेटी को भेज दिया है। लाइब्रेरी में सीनियरटी के आधार पर प्रमोशन के लिए डीन फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक हो चुकी है इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है। उन्होंने बताया कि साइंस फैकल्टी में तकनीकी पदों पर प्रमोशन के लिए कुंटिया की मांग के अनुरूप दो कर्मचारियों की प्रमोशन को प्रशासन ने अनुमति प्रदान कर दी है।
2003 के कर्मचारियों को एसीपी मामले में केस राज्य सरकार ने कई बार खारिज किया है, फिर भी कुंटिया से हुई बातचीत के आधार पर स्थापना शाखा की और से राज्य सरकार को पत्र भेजा जा रहा है। एसएफएस कर्मचारियों के लिए प्रमोशन चैनल बनाने के संबंध में कुंटिया ने पिछले सप्ताह ही इन पदों की जानकारी प्रशासन को दी है। इसके लिए भी सकारात्मक दिशा में काम चल रहा है। यूनिवर्सिटी में गैरशिक्षक कर्मचारियों के खाली पड़े पदों को भरने के संबंध में केयू प्रशासन की ओर से प्रयास जारी हैं।
पूर्नमूल्यांकन शाखा में कर्मचारियों को कोडिंग व डिकोडिंग के लिए पहले ही ओवर टाइम दिया जा रहा है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में रिटायर्ड कर्मचारियों को सुपरवाइजरी ड्यूटी देने के संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर दी गई है और यूनिवर्सिटी में सुपरवाइजरी स्तर पर कोई रिटायर्ड कर्मचारी काम नहीं कर रहा है। इंजीनियरिंग कालेजों को केयू से संबद्ध करने व न करने का निर्णय राज्य सरकार के स्तर का है, लेकिन अगर कुंटिया कोई प्रस्ताव देती है तो यूनिवर्सिटी प्रशासन उसे निश्चित रुप से सरकार को भेज देगा। कर्मचारियों से हड़ताल छोड़ने की अपील की है अगर इसके बाद भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो प्रशासन नियमानुसार उचित कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।
हमने कोई वार्ता ही नहीं हुइ : कुंटिया प्रधान
अजीब स्थिति तब बन गई जब इस वार्ता के बारे में कुंटिया प्रधान ने सीधे तौर पर इनकार कर दिया। कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने बताया कि इस तरह को कोई वार्ता ही नहीं हुई है। हमारी जो मांगें हैं पहले से साफ हैं। जब कोई वार्ता ही नहीं हुई तो नई मांग का सवाल ही नहीं उठता। गुर्जर ने साफ तौर पर कहा है कि हड़ताल वापस नहीं होगी यह लगातार जारी रहेगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कुंटिया से विश्वासघात किया और सभी कर्मचारियों को धोखा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले आश्वासन के बाद हमने हड़ताल खत्म की थी। लेकिन केयू प्रशासन ने विश्वासघात किया।