कुरुक्षेत्र। गर्मी के मौसम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसके चलते लगातार तापमान बढ़ रहा है। दिन भर लू चलने लगी है तो धूप भी तेज होने लगी है। सोमवार को भी अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक रहा। वहीं इसी सप्ताह हल्की राहत के बाद फिर से पारा चढ़ने लगेगा। बढ़ती गर्मी के चलते जहां लोग बचाव करते दिखाई दिए वहीं अब सब्जी उत्पादक किसान भी चिंतित होने लगे हैँ।
बढ़ता तापमान जहां आम आदमी एवं पशुओं के लिए नुकसानदायक है वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. सीबी सिंह के अनुसार बढ़ता तापमान सब्जियों की फसलों के लिए अधिक खतरा बनता है। अधिक तापमान से सब्जियों की फसल की पैदावार और गुणवत्ता को प्रभावित करता है। यह पौधों के विकास को धीमा कर देता है तथा फसल को नुकसान पहुंचाता है।
बढ़ते तापमान का प्रभाव सीधे पौधों के विकास पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गर्मी में तापमान में मामूली सा बदलाव भी फसल की पैदावार को कम कर सकता है। बढ़ते तापमान से कीटों और बीमारियों का प्रसार बढ़ जाता है, जिससे फसलों को और नुकसान होता है।
उच्च तापमान से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। डाॅ. सिंह के अनुसार तापमान में वृद्धि से मिट्टी में लवणता बढ़ जाती है, जो पौधों की वृद्धि को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जलवायु स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाकर जैसे कि पानी का बेहतर उपयोग, फसल अवशेषों का उपयोग, मल्चिंग, मिट्टी की नमी को संरक्षित किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन अनुकूल कृषि पद्वति अपनानी होगी : डॉ सिंह
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. सीबी सिंह का कहना है कि किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जैसे कम अवधि की फसलों को उगाना। आज भी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अधिक शोध और विकास की आवश्यकता है जैसे कि ग्राफ्टिंग तकनीक और अन्य जलवायु परिवर्तन के अनुकूल तकनीकों का उपयोग शामिल है। आजकल बढ़ती गर्मी को देखते हुए किसानों को खेतों में सब्जियों की फसलों में शाम के समय कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के परामर्श से सिंचाई करनी चाहिए।