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पीवी के बाद राइस मिर्ल्स को रिकवरी के नोटिस थमाए जाने से व्यापारी खफा

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राइस मिर्ल्स को शार्टेज के नाम पर भेजे गए रिकवरी के नोटिस दिखाता व्यापारी । - फोटो : Kurukshetra
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राइस मिलों में फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद मिलर्स को शॉर्टेज के नाम पर डीएफएससी की ओर से रिकवरी के नोटिस दिए जाने से व्यापारियों में सरकार के खिलाफ रोष है। ये जानकारी राइस मिलर एसोसिएशन के प्रदेश उपप्रधान जनकराज सिंगला ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियां व्यापारियों का शोषण कर रहीहै। धान के घटने के पीछे व्यापारियों का कोई हाथ नहीं, बल्कि सरकार की नीतियां ही जिम्मेदार हैं।
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सरकारी की नीति के अनुसार राइस मिलर्स ने 17 प्रतिशत नमी युक्त धान की खरीद मंडियों से की। चावल की कुटाई के लिए इस धान को 13 से 14 प्रतिशत नमी तक सुखाया गया। तभी धान से चावल निकलेगा। ऐसे में वजन घटना लाजमी है। अब व्यापारियों को 9.84 प्रतिशत ब्याज लगाकर नोटिस थमाया जा रहे हैं। अगर कोई व्यापारी 50 हजार क्विंटल की खरीद करता है तो चावल कुटाई के लिए धान सुखाते समय डेढ़ से दो क्विंटल धान वैसे ही कम हो जाती है। इसके बाद जो टुकड़ा चावल, स्माल ब्रोकन, चावल का सामान्यसे छोटा दाना जिसे सरकार नहीं खरीदती है। अगर उसे भी निकाला जाये तो हजारों क्विंटल धान तो वैसे ही कम हो जाएगा, लेकिन सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए व्यापारियों को रिकवरी भरे नोटिस थमा रही है। आरोप लगाते हुए कहा कि एफसीआई के गोदामों में चावल रखने की जगह नहीं है और अधिकारी मिलीभगत करके स्पेस बेच रहे हैं। लूट के इस कारोबार में नेताओं से लेकर अधिकारी तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जब व्यापारियों ने धान खरीद बंद की थी, तब सरकार ने खरीद शुरू करने पर उनकी सभी मांगे मानने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब सरकार धान खरीद के बाद तीन-तीन बार पीवी कर उनको ही चोर साबित करने का प्रयास कर रही है। दो बार की पीवी में जब कोई बात सामने नहीं आई तो तीसरी बार फिर से जानबूझकर पीवी करवाई गई। अब 31 मार्च तक चावल सरकार को लौटाना है। सरकार के पास गोदामों में जगह ही नहीं है। मार्च के बाद गेहूं का सीजन शुरू हो जाएगा और लेबर सीजन में चली जाएगी। अभी नमी ने व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया है और मार्च के बाद गर्मी पड़ने से चावल का वजन सूखकर घट जाएगा। ऐसे में व्यापारी पर दोहरी मार पड़ेगी। लिहाजा अब व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि सरकार के इस फरमान के खिलाफ वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यदि सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए व्यापारियों से बातचीत नहीं की और रिकवरी के नोटिस को वापस नहीं लिए तो आगामी सीजन से व्यापारी धान खरीद में सरकार का कोई सहयोग नहीं करेंगे।
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